रायगढ़ मुनादी।। इन दिनों रायगढ़ पुलिस की डिक्शनरी काफी चर्चा में है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर रायगढ़ पुलिस इस शब्द को सही तरीके से डिफाइन कर रही है या हमने जो इसका अर्थ समझ था वह सही है। उस शब्द का नाम है "Sensetive" । रायगढ़ पुलिस ने इस शब्द को नए ढंग से परिभाषित कर तमाम अंग्रेजीदानों को कंफ्यूज कर दिया है।
दरअसल रायगढ़ पुलिस राजनीतिज्ञों से जुड़े मामलों को सेंसेटिव बताकर उनका FIR अपने पोर्टल में लॉक कर रही है। चाहे मामला कांग्रेस नेता से जुड़ी हो या भाजपा नेता से। उनका मामला सेंसेटिव होता है। हालांकि आप यह बिल्कुल मत सोचिएगा की इस परिभाषा की श्रेणी में और कोई वर्ग आता होगा। बाकी वर्ग के मामले कत्तई सेंसेटिव नहीं होते। पत्रकार वकील तो इस श्रेणी में दूर-दूर तक नहीं हैं और जहां तक आम जनता की बात है तो वो इस दायरे में कभी आती ही नहीं, जनता का मामला चाहे जितना सेंसेटिव (आपको लग सकता है) हो उसे सेंसेटिव नहीं कहते।
तो रायगढ़ पुलिस ने अंग्रेजी के नए शब्दकोष में सेंसिटिव शब्द की नई परिभाषा गढ़ दी है। आपने भले अबतक इसका मतलब संवेदनशील होना समझते होंगे लेकिन यह गलत है। दरअसल सेंसेटिव का सही मतलब राजनीतिक दल से जुड़ा व्यक्ति या आप अपने शब्द में नेता कह सकते हैं। उनके असंवेदनशील मामले भी सेंसेटिव की श्रेणी में आते हैं, बकौल रायगढ़ पुलिस।
कुछ दिन पहले भाजपा के जिलाध्यक्ष पर छेड़छाड़ का आरोप लगा और थाने में शिकायत के बाद उसपर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली लेकिन पुलिस के पोर्टल में उसे सेंसेटिव बताकर लॉक कर दिया गया। उसी तरह विधायक के बेटे द्वारा थाने में घुसकर मारपीट के एक मामले में भी पुलिस ने सेंसेटिव बताकर उसका FIR अपने पोर्टल में लॉक कर दिया। हालांकि रायगढ़ पुलिस ने यह अभी तक क्लियर नहीं किया है कि इसमें मामला सेंसेटिव है या आरोपी या उनके दवाब में पुलिस सेंसेटिव हो गई है।
हालाँकि ऐसे कई मामले हैं जो सेंसेटिव हैं लेकिन वे किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं इसलिए वे सेंसेटिव नहीं कह जाते हैं। एक कांग्रेस पार्षद के आत्महत्या के मामले में पुलिस इतनी सेंसेटिव है कि एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मुंह पर चुप्पी का झालर लगा लिया है। उसमें जांच क्या हुई या होगी, इस मामले पर ज्यादा ही सेंसेटिव हो गयी है। ऐसे में तमाम तरह की अफवाह अब शहर में है लेकिन पुलिस सेंसेटिव है।

