जाशपुर मुनादी।। जिले के कुनकुरी में इस वर्ष पहली बार सरहुल पूजा का आयोजन हुआ । रविवार को कुनकुरी के सरना पूजा स्थल पर आस पास के गाँव के लोगों ने एकत्रित होकर सरहुल पर्व मनाया और प्रकृति की पूजा की ।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किये गए उरांव समाज के नेता व उरांव समाज कर्मचारी अधिकारी संघ के अध्यक्ष उमेश प्रधान ने मुनादी डॉट से विशेष चर्चा में सरहुल पर्व के महत्व को बताया और कहा कि यह सबसे बड़ी बिडम्बना है कि उरांव आदिवासी समाज पूरे एशिया में है लेकिन आजतक इस समाज का कोई संगठनात्मक ढांचा तैयार नहीं हो पाया और आज तक उरांव आदिवासी समाज केवल और केवल राजनीतिक उपयोग की वस्तु बनकर रह गया है।
समाज कई वर्ग और व्यवस्थाओं में बंटा हुआ है जिसके चलते आज तक इस समाज का उत्थान और विस्तार होने के बजाय केवल शोषण होता आ रहा है।समाज मे शिक्षा का विस्तार और राजनीति में ऊंची पहुंच के बावजूद उरांव आदिवासी समाज आज तक पिछड़ा हुआ है यह सबसे बड़ी विडंबना है।
उमेश प्रशान ने आगे कहा कि जशपुर जिले में संगठनात्मक ढांचा तैयार किया जा रहा है।अबतक 150 गावों में उनके द्वारा समाज का संगठन तैयार किया गया है और भविष्य में संगठन का और विस्तार किया जाएगा।

