23-April-2022


निजी स्कूलों की तरह इस सरकारी स्कूल में भी शुरु हुआ ये काम, पहली बार स्कूल के शिक्षक और पालको का सम्मेलन भी हुआ ,पढिये पूरी खबर



निजी विद्यालयों की तर्ज पर एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय सन्ना में पहली बार अभिभावकों के साथ शिक्षकों भी हुई बैठक।

अभिभावक के साथ बैठकर क्लास टीचर ने बच्चों की गतिविधियों सहित स्कूल आने, पढ़ाई, बच्चों की खूबियां व कमजोरी पर चर्चा की।

बैठक मे एकलव्य स्कूल के प्राचार्य श्रीमती अंजना तिर्की ने कहा की
बच्चों में जीवन जीने के सलीके में बहुत बदलाव आ गया है। आज का नागरिक अपना जीवन अपने अंदाज में व्यतीत करना चाहता है। इसमें किसी का हस्तक्षेप करना उसे बिल्कुल पसंद नहीं है। इस जीवन जीने की कला में वह अपनी जिम्मेदारियों से बचने का भी प्रयास कर रहा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव परिवार और समाज पर पड़ रहा है। हमें विशेषकर अभिभावकों ओर शिक्षकों का मार्गदर्शन बच्चों के जीवन जीने की शैली को बहुत हद तक प्रभावित करता है। हमें उनकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों के प्रति भी जागरूक करना होगा। ऐसा नहीं करते हैं तो युवा पीढ़ी अपने जीवन और उनके दायित्वों के बारे में जिम्मेदार नहीं हो पाएंगे।


साथ उन्होंने कहा की आज का विद्यार्थी मेधावी, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बहुत अधिक रुचि रखता है लेकिन सुसंस्कारित नहीं है। अच्छे संस्कारों की कमी के कारण उठना, बैठना, बोलना, बड़ों का आदर सत्कार, माता-पिता, गुरुजनों के सम्मान में रुचि नहीं रखता। इन सबका कारण माता-पिता के समय अभाव एवं संयुक्त परिवार का कम होना है। प्रत्येक माता पिता यह उम्मीद करते है कि उनका बच्चा बेहतर शिक्षा ग्रहण करे, अच्छे संस्कार स्कूल में शिक्षक भी सिखाएं। विषय ज्ञान के लिए विद्यार्थी उत्तरदायित्व हैं लेकिन संस्कारों, वास्तविक प्रयोगशाला तो घर एवं परिवार हैं जहां बच्चों के व्यवहार एवं संस्कारों का वास्तविक प्रयोग होता है। आज का शिक्षक एवं छात्र दोनों अंकों के खेल में व्यस्त हो गए हैं। उनका एक ही लक्ष्य सर्वाधिक अंक लाकर कुछ बनने का होता है। अध्यापक भी छात्रों के सर्वांगीण विकास के स्थान पर मानसिक विकास पर केंद्रीत होता है। इस भागदौड़ में जीवन के अच्छा नागरिक या अच्छा इंसान बनाने की पहलू अछूते रह जाते हैं। हमारे समय में शिक्षक एक ईश्वर की तरह वास्तविक रूप से पूज्यनीय होते थे। आज इस स्तर में बहुत बदलाव आया हुआ है। इसके लिए हम सभी समाज के लोग जिम्मेदार हैं।

माता-पिता को पता हो कि स्कूल में क्या हो रहा है

अभिभावकों का कहना है की हर महीने बैठक हो जिसे बच्चों की पढ़ाई की जानकारी लेकर कहा हर माह बैठक होना चाहिए।जिससे मालूम होना चाहिए कि स्कूल में उनकी बेटी क्या कर रही है। हर माह बुलाए तो बेहतर रहेगा। पालकों को भी मालूम होना चाहिए कि स्कूल में शिक्षक कैसे पढ़ाते हैं। बच्चों की पढ़ाई का स्तर क्या है। इस तरह की बैठक से अगर कुछ कमियां होंगी तो उसमें सुधार भी किया जा सकता है

वहीं पहली बार एकलव्य स्कूल में इस तरह हुई बैठक को लेकर पालकों में उत्साह रहा।

विभिन्न विषयों पर भी हुई चर्चा

• अभिभावक नशे की हालत मे छात्रवास परिसर मे बच्चो से मिलने न आये।
• माता-पिता,भाई-बहन व अपने परिवार के सदस्यों के अलावा अन्य को न भेजे।
• समय समय पर बच्चो के कमजोरियाँ व अच्छाई को शिक्षकों से साझा करें व बच्चो को घर मे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।
• छात्राओं का आधार बैंक खाता नंबर जैसे जरूरी चीज हमेशा अपडेट रखे।

वही इस बैठक मे स्कूल के समस्त शिक्षकों के साथ छात्राओं के परिजन मौजूद रहे।








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