रायगढ़ मुनादी।। ओपी जिंदल इंडस्ट्रियल पार्क के उद्योगों और जिंदल प्रबंधन के बीच अब तकरार बढ़ गयी है। पार्क में स्थित उद्योगों के संघ रायगढ़ इस्पात संघ ने जहां जिंदल प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि उनके द्वारा बिजली न दिए जाने से उन्हें बहुत नुकसान हो रहा है वही जिंदल प्रबंधन का कहना है कि हम अपनी क्षमता से बेहतर सेवा दे रहे हैं लेकिन कोयला की कीमत में वृद्धि के कारण उसकी लागत बढ़ रही है और संघ बढ़ी दरें देने को राजी नहीं है, ऐसे में मिल बैठकर मामले का हल निकाला जाना चाहिए।
रायगढ़ इस्पात संघ ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर यह आरोप लगाया था कि जिंदल स्टील एंड पावर प्रबंधन की हठधर्मिता के कारण उनके उद्योग बंद होने के कगार पर हैं। प्रबंधन अपने ही उन वादों को पूरा नहीं कर रही है जिसमें उस पार्क में उद्योग लगाने के एवज में उन्हें सस्ती बिजली देने की बात की गई थी। उन्हें 24 घंटे में मात्र 8 घंटे बिजली दी जा रही है जिसमे उनका फर्निश गर्म तक नहीं होता।
इस मामले को लेकर संघ ने कलेक्टर रायगढ़ से भी हस्तक्षेप की मांग की थी और इस मामले में त्रिपक्षीय वार्ता भी हुई लेकिन जिंदल प्रबंधन की ओर से कोई पहल नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि यही हाल रहा तो संघ के उद्योगपति जिंदल गेट के सामने प्रदर्शन करने और आर्थिक नाकेबंदी को बाध्य होंगे।
इस मसले पर जब मुनादी ने JSPL से बात की तो उन्होंने कहा कि कोयला की दर बेतहाशा बढ़ी है और संघ के उद्योग बिजली के डर बढ़ाने को राजी नहीं हैं। पूँजीपतरा औधयोगिक पार्क में ऊर्जा वितरण को लेकर तरह तरह की खबरें आ रही हैं जिनका हम खंडन करते हुए यह इस्पष्ट करना चाहते हैं कि जिंदल स्टील अपने विद्युत वितरण दायित्वों को पूर्ण करने के लिए एक समझौते के तहत विद्युत प्रदाय कर रहा था।
विधुत वितरण किस दर पे की जाएगी इसका निश्चय प्रदेश का विधुत रेग्युलटॉरी कमिशन करता है जहाँ पर आज तारीख तक उसका ऐन्यूअल रेवन्यू रेक्वायअर्मेंट किसी ना किसी करणो से तय नहीं किया जा सका। फलस्वरूप हमें अपने आपसी समझौते की दर पर इंडस्ट्रीयल पार्क स्थित सभी उधयोगों को विधुत प्रदाय करनी पड़ी।
इन सब स्थितियों की वजह से बड़े लम्बे समय से पहले रेग्युलटॉरी कमिशन फिर दिल्ली स्थित अपटेल अथॉरिटी , प्रदेश का उच्च नयालय, तथा सुप्रीम कोर्ट में वाद-विवाद चल रहा है। हाल ही में कुछ दो महीने से अपटेल अथॉरिटी में चल रही सुनवायी में औद्योगिक पार्क के रायगढ़ स्पात औधयोगिक संघ (RIUS) ने यह लिखित में दे दिया की उसको समझौते की दर पर विद्युत लेना मान्य नहीं है।इस लेख से और कोयले की अनुबलब्धता और उसके परिवेश में बढ़ती दरें ₹ 10-12 हज़ार प्रति टन ने विद्युत आपूर्ति करना नामुमकिन सा कर दिया।
RIUS बढ़ी हुई दरों पर विद्युत आपूर्ति के लिए राज़ी नहीं हैं फिर भी हम कुछ विधुत रोटेशन प्रनाडी के तहत सभी को देने की चेष्टा कर रहें है जिसका भारी नुक़सान हमें उठाना पड़ रहा है। इस समस्या का तुरंत समाधान करने के लिए हमने प्रदेश के विद्युत रेग्युलटॉरी कमिशन में सभी न्यायिक प्रक्रियाओं के समाप्त होने तक और फ़ाइनल विद्युत दर तय हो जाने तक प्रविज़नल दर तय करने के लिए आवेदन भी दे दिया है।जिंदल स्टील अपने विद्युत वितरण लाइसेन्स के दायित्वों को पूर्ण रूप से समझता है और उसे पूर्ण करने के लिए वचनबद्ध भी है।

