जशपुर मुनादी।
सरकार इन दिनों वन विभाग की सर्जरी की है। इसी सप्ताह के 21 अप्रैल याने गुरुवार को सरकार ने 168 रेंजरों का तबादला किया, जो तबादलों की एक जम्बो सूची कही जा सकती है। यूँ तो सूची देखने से ऐसा लगता ये सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो, पर इस ट्रांसफर आदेश में एक आदेश ऐसा रहा, जिसे जुगाड़ का खेल कहने से लोग नही चूक रहे हैं।
अब आप सोच रहे होंगे कि 168 रेंजरों के ट्रांसफर सूची में ऐसा क्या हुआ जिसे जुगाड़ का नाम दिया जा रहा है। दरअसल ये सारा मामला भी जशपुर जिले से ही संबंधित है। सूची में एक रेंजर का स्थानांतरण सूची में ऐसा हुआ हुआ है कि आदेश में जिस जगह से स्थानांतरण हुआ, उसी जगह पदस्थापना का भी आदेश हो गया, मतलब की जगह और कुर्सी वही, और स्थानांतरण भी वहीं, न पद बदला, न जगह बदली कुर्सी भी वही, बस सूची में नाम दर्शा दिया गया।
इन स्थानांतरणों से सरकार की कवायद यही दिख रही कि विभाग को चुस्त दुरुस्त किया जाए, वर्षों से जमे लोगों को यहां से वहां कर दिया गया, पर कवायदों के बीच वर्षों से जमे लोगो के लिए भी कुछ खेल ऐसा हुआ कि "जुगाड़" एक कारगर शब्द के रूप में उपयोग होता दिखता है।
अब जशपुर जिले के इन रेंजर साहब की ही सूची में नाम देख लें, जो बग़ीचा के रेंजर अशोक सिंह हैं, सालों से कुर्सी पर जमे हैं, सूची में इनका नाम 30 वें नम्बर पर भी है, पर स्थान्तरित स्थान देखेंगे तो माथा पकड़ लेंगे, बग़ीचा के रेंजर से तबादला कर बग़ीचा के रेंजर के ही रूप में पदस्थापना दे दी जाती है, और तबादले की सूची में नाम भी अंकित हो जाता है।
अब इतनी मेहरबानी तो यूँ ही नही होता होगा, ऐसा जरूर कह सकते हैं कि कुछ बेहतर काम किया होगा, जो साहब के ऊपर सूची बनाने वालों की कद्रदानी रही। भले ही यह पता न हो कि इतने वर्षों से जमे होने के बाद बग़ीचा वन विभाग के लिए क्या बेहतर हुआ।
इधर इस सम्बंध में जब रेंजर अशोक सिंह से मुनादी डॉट कॉम ने बात की तो उन्होंने बताया कि एक वर्ष पूर्व उनका प्रमोशन हो चुका था और प्रमोशन के बाद उनकी पुनः पोस्टिंग की गई है।उन्होंने बताया कि पहले वह बगीचा के प्रभारी रेंजर थे इस पोस्टिंग के बाद उन्हें बगीचा रेंज का फूल फ्लैश चार्ज मिल गया है।केवल बगीचा ही नहीं कई रेंज में ऐसा हुआ है ।हांलाकि शासन द्वारा जारी तबादले की सूची में प्रभार और प्रमोशन का कोई जिक्र नहीं है ।

