06-May-2022


यकीन करेंगे? एक लीची का दाम एक हजार रुपये ! 40 लीची का 40 हजार ! लीची के लिए मशहूर जशपुर में लीची को लेकर आया अनोखा मामला ,पढिये पुरी खबर



जशपुर मुनादी ।। तपकरा थाने के सिंगिबहार में मौसमी फल लीची को लेकर जमकर हंगामा हुआ है।बताया जा रहा है कि सिंगिबहार से लगे ओडीशा के लुलकीडीह (बिछी टोली)के तकरीबन 7-8बच्चे सिंगिबहार के परमेश्वर साहू के लीची बगान में घुस गए और लीची तोड़ने लगे।बगान मालिक को जैसे ही पता चला कि बगान में कुछ बच्चे घुस आए हैं और लीची तोड़ रहे हैं तो बगान मालिक वहाँ पहुँच गया और सभी बच्चों को पकड़कर पीटने लगा ,उनकी साइकिलें और मोबाईल को जप्त करके सभी बच्चों को अपने घर मे बैठा लिया ।

बच्चों के परिजनों को जब इसकी जानकारी मिली तो बच्चे के परिजन भागे भागे सिंगी बहार पहुँचे ।वहाँ पहुंचने के बाद उन्होंने बगान मालिक से बच्चों को छोड़ देने की मिन्नत करने लगे ।बच्चों को छोड़ने का जो बगान मालिक ने शर्त रखा उसे सुनकर आप चौंके बगैर नहीं रह पाएंगे ।बगान मालिक द्वारा बच्चों के द्वारा तोड़े गए लीची की गिनती की गयी तो पता चला बच्चों ने बगान से कुल 40 लीची तोड़े थे ।इन चालीस लीची को सामने रखते हुए बगान मालिक ने 40 लीची के बदले 40 हजार रुपये की मांग करने लगा याने प्रति लीची 1 हजार ।बगान मालिक के इस डिमांड को सुनकर बच्चों के परिजनों के होश उड़ गए ।

प्रति लीची 1 हजार जुर्माने के तौर पर भरने के लिए परिजन तैयार नहीं हुए ।बताया जा रहा है कि परिजन 10 हजार तक देने को तैयार भी हो गए लेकिन बात इतने पर भी नहीं बनी तो परिजन मामले की शिकायत लेकर सीधे तपकरा थाना पहुँच गए और मामले की शिकायत कर दी । इसी बीच सिंगी बहार के सरपँच पति विनोद पैंकरा ने हस्तक्षेप करके बच्चो को बगान मालिक के घर से अपने पास बुला लिया और परिजनों को सुपुर्द करवा दिया । बताया जा रहा है कि अभी तक इस मामले में लिखित शिकायत नहीं हुई है लेकिन चुकी मामला छोटे छोटे बच्चों से जुड़ा है इसलिए पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

इधर इस मामले में परमेश्वर साहू (बगान मालिक)से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि बच्चों के द्वारा उनके बगान के तकरीबन 10 पेंड को नूकसान पहुंचाया गया ।लीची अभी पका नही है इसलिए बच्चों ने लीची की डाल को ही तोड़ डाला ।इसलिए उनके घरवालों से हर्जाने के तौर पर कुछ रुपये की मांग कर रहे थे लेकिन उनके साथ कोई मार पीट नही की गई न ही उंन्हे बैठाकर रखा गया । थोड़ी देर बाद ही बच्चों को छोड़ दिया गया था।बच्चो के घरवाले जो आरोप लगा रहे है वह पूरी तरह गलत है।








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