रायगढ़ मुनादी।। शनिवार को जिला भाजपा के तत्वाधान में भूपेश सरकार द्वारा राजनीतिक रैली और प्रदर्शन को लेकर जारी नए आदेश के विरोध में प्रदर्शन और गिरफ्तारी का आयोजन किया गया था। इसमें 359 भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पुलिस के सामने गिरफ्तारी दी। लेकिन लोगो ने भीड़ देखकर कहा कि इससे ज्यादा भीड़ तो कुछ दिन पहले विभाष सिंह द्वारा निकली गई रैली में थी।
भाजपा के पूर्व निर्धारित इस कार्यक्रम में स्थानीय सांसद, भाजपा नेता ओपी चौधरी, सत्यानंद राठिया, भाजपा जिलाध्यक्ष उमेश अग्रवाल समेत सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने सरकार के उस नियम के खिलाफ गिरफ्तारी दी जिसमें कोई भी प्रदर्शन से पहले प्रशासन से अनुमति लेने की को अनिवार्य किया गया है। इससे पहले भाजपा द्वारा बुलाये गए प्रेस कांफ्रेंस में यह कहा गया था कि 15 दिन बाद भाजपा इस नियम के विरोध में गिरफ्तारी देगी। उसी तारतम्य में आज भाजपा के लोगों ने गिरफ्तारी दी।
इस प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग नेताओं के नाम से नारे लगाए जा रहे थे। जिसमें हमारा विधायक कैसा हो वाला नारा भी जुड़ा हुआ था। इस रैली में पार्टी से कथित निलंबित नेता आशीष ताम्रकार ने भी हिस्सा लिया और उनके समर्थक भी इस रैली में मौजूद थे। कुछ लोग भाजपा नेता ओपी चौधरी के समर्थन में भी नारे लगा रहे थे। इस रैली से निपटने पुलिस ने बड़ी तैयारी की हुई थी लेकिन उत्साही लोगों के सामने उनकी व्यवस्था धरी की धरी राह गयी।
कॉलेक्टोरेट पहुंचते ही भीड़ बेकाबू होने लगी। किसी ने एक पुलिसवाले की टोपी भी उछाल दी तो कुछ लड़के पोलिवे का डंडा पकड़ कर कूदते दिखाई दिए। हालांकि इस झूम झटकी के बीच भाजपा जिलाध्यक्ष उमेश अग्रवाल को चक्कर आ गया और वे गिर गए। इसके बाद भाजपा के दो नेत्रियां भी गिर गई। उनका कहना था कि पुलिस का डंडा उनके नाक में लग गया जिससे वे गिर गई। हालांकि इस दौरान पुलिस संयत दिखी।
इस पूरे रैली में 359 लोगों की गिरफ्तारी की गई। इसपर के लोगों का कहना था की कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थन में कांग्रेस नेता विभाष सिंह ने मुख्यमंन्त्री के समर्थन और भाजपा जिलाध्यक्ष की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जो रैली निकाली थी वो इस भीड़ से बहुत ज्यादा थी। वैसे रैली की भीड़ को लेकर अलग-अलग चर्चा प्रदर्शन स्थल पर ही शुरू हो गयी थी।

बहरहाल भाजपा का जिला मुख्यालय में शक्ति प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। लोकतंत्र में भीड़ को शक्ति प्रदर्शन का पैमाना माना जाता है। जिस स्तर के नेताओं की भागीदारी यहां थी उस हिसाब से भीड़ नहीं जुटी। हालांकि इसके लिए गर्मी भी जिम्मेदार हो सकती है। इस जोरदार गर्मी में कम ही ऐसे लोग होते हैं जो बाहर निकलने का साहस करते हैं।

