रायगढ़ जिले में वन्य जीवों के अवशेष की तस्करी करने का सनसनी खेज मामला सामने आया है। इसे कोतवाली थाना प्रभारी ने रात्रि गश्त के दौरान मिली सूचना के आधार पर खुलासा किया लेकिन दिन भर चले घटना क्रम के बाद भी यह स्पस्ट नही हो पाया कि तस्करी की जाने वाली अवशेष किस वन्य जीव की है। तस्करी का यह मामला शहर के मारवाड़ी पंचयती धरमशाला से किया जा रहा था और यही से अवशेष के साथ आरोपियो को धर दबोचा गया। फिलहाल इस मामले में पुलिस ने जप्त की गई अवशेष और आरोपियो को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस वन्य जीव अवशेष के खरीदने के लिए कुछ ऐसे लोग भी सामने आए थे बताया तो यह भी जा रहा है कि आरोपियो द्वारा जंगली सुवर का दांत बताकर बेचने की मंशा से मारवाड़ी पंचायती धर्मशाला में ठहरे हुए थे।

जिले में वन्य जीवों के अवशेष की तस्करी लूके पिछे तरीके से चल रहा है। कुछ माह पहले वन विभाग की टीम ने शहर में पूजा पाठ व जड़ी बुटी की सामग्री बेचने वाले तीन व्यापारियों के पास से वन्य जीवों का अवशेष बरामद किया था। जिसमे तीनों के विरुद्ध वन विभाग ने वन्य प्राणी अधिनियम के तहत मामला भी दर्ज किया है। वहीं एक ताजा मामले में शहर के मारवाड़ी पंचायती धर्मशाला में बीती रात कोतवाली पुलिस को मुखबीर से सूचना मिली थी कि कुछ ग्रामीण वन्य जीवों के अवशेष को बेचने की फिराक में ठहरे हुए हैं। ऐसे में सूचना पर कोतवाली पुलिस ने देर रात धर्मशाला में छापामार कर तीन आरोपियों के पास से संदिग्ध जंगली सुअर का दांत जब्त किया है। कोतवाली मेंं दिन पर आरोपियों से पूछताछ और पशु चिकित्सक से प्रारंभिक परीक्षण कराकर कोतवाली पुलिस ने पूरे मामले को वन विभाग के सुपूर्द कर दिया है। पकड़े गए आरोपियों में अजित तिग्गा पिता जीवर्धन तिग्गा उम्र 36 वर्ष, दिलीप यादव पिता मोती यादव 43 वर्ष व हेतराम निषाद पिता वैद्य निषाद उम्र 60 वर्ष शामिल हैं। बताया गया कि सभी आरोपी सेरदु लैलूंगा के रहने वाले हैं। आरोपियों की माने तो वे तीन दिनों से मारवाड़ी धर्मशाला में ठहरे हुए थे और ग्राहक का इंतजार कर रहे थे। अब मामला वन विभाग के सुपूर्द कर दिया गया है जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि आरोपियों से जब्त 2 नग दांत नूमा वस्तु किस जंगली जानवर का है। हालाकि आरोपियों ने इसे जंगली सुअर का दांत बताया है।

