रायगढ़ मुनादी।।
मतगणना में धांधली की शिकायत किये जाने के प्रत्युत्तर में राज्य निर्वाचन आयोग के एक पत्र पर भाजपा ने आयोग पर ही सवाल उठा दिया है। दो दिन पहले भाजपा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मतगणना में धांधली की शिकायत की थी और इस आशय का एक ज्ञापन राज्य निर्वाचन आयोग को भी भेजी थी लेकिन निर्वाचन आयोग के सचिव को जो पत्र सामने आया है उसमें स्थानीय कलेक्टर से प्रक्रिया से मतगणना करवाने का निवेदन किया गया है, जिस पर भाजपा ने आपत्ति जताई है।
भाजपा के आलोक सिंह ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मतगणना में धांधली की शिकायत करते हुए कहा है कि धांधली के दम पर जिला पंचायत जनपद पंचायत में अपनी सरकार बनाने जा रही कांग्रेस को राज्य निर्वाचन आयोग ने एक तरीके से मौन सहमति दे दी है। पहले चक्र के बाद ही जिला भाजपा ने राज्य निर्वाचन आयोग के पास धांधली में मतगणना अधिकारियों की खुली भूमिका की शिकायत कर दी गई थी। मैने इस बारे में मयदस्तावेज अखबारों और सोशल मीडिया में अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई थी इसके बावजूद दूसरे चरण में भी निर्वाचन आयोग ने शिकायत को कोई तबज्जो नही दी। अब जब दो चरण के चुनाव हो चुके है और गणना में धांधली के दम पर जिला पंचायत और जनपद पंचायतों में बहुमत के करीब पहुच गई है तो राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव ने कलेक्टर / जिला निर्वाचन अधिकारी स्थानीय निर्वाचन से "निवेदन" किया है कि मतगणना पर्चियों में सभी अभ्यर्थियों की प्रविष्टियों सहित गणना पर्ची प्रदान की जाय।

उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि राज्य निर्वाचन आयोग यह स्वीकार कर रहा है कि उसे शिकायत मिली है कि अभ्यर्थी को केवल उसकी एक प्रविष्टि अंकित कर गणना पर्ची प्रदान की जा रही है। इसके बावजूद बजाय चुनाव निरस्त करने स्थगित करने के बजाय केवल निवेदन से काम चला रहा है। जबकि आरोप यहां तक लग रहे हैं कि इसकी आड़ में न केवल दूर दराज के क्षेत्रों में गणना में हेर फेर कर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को जिताया गया बल्कि त्रिस्तरीय चुनाव को मजाक बना दिया गया। मतगणना में कही लाइट गुल कर मत इधर उधर किये गए तो कही टोटल में मतदान से ज्यादा या कम व्होट होने के बाद भी कोई शिकायत पीठासीन अधिकारियों द्वारा नही ली गई।
यह बेहद सामान्य सी बात है कि शिकायत पर जाच होनी चाहिए और प्रारंभीक जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित पर सरकारी सेवा अधिनियम के तहत तत्काल निलंबित कर उस पर उसके सेवा से बर्खास्तगी की कार्यवाही की जानी चाहिए। दूसरी तरफ हो चुकी निर्वाचन प्रक्रिया को संदेहास्पद मानते हुए तब तक अधिकृत तौर पर परिणाम की घोषणा नही करनी चाहिए जब तक प्रकरण का निपटारा न हो जाये। मगर ऐसी किसी भी कार्यवाही की जगह राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव कलेक्टर से निवेदन की औपचारिकता पूरी कर चुनावी धांधली से आंखे फेर रहे है। ऐसे में त्रिस्तरीय चुनाव का छतीसगढ़ में कोई मतलब नहीं रह गया है।

