02-February-2020


सरकार की अच्छी योजना पर राजस्व अधिकारियों की बुरी नजर, ज़मीन कब्जा करवाने का चल रहा है ठेका, खुला खेल का सच , पढिये खबर



रायगढ़ मुनादी।।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नजूल पट्टेदारों को मालिकाना हक देने तथा रिक्त भूमि को बाजार मूल्य से 152 प्रतिशत की दर पर खरीददारों को देने की महत्वाकांक्षी योजना में कुछ पटवारी और आरआई द्वारा सेंध लगा कर अपनी जेब भरने का जो अभियान चलाया गया है। उससे छत्तीसगढ़ शासन को न केवल राजस्व की हानि हो रही है बल्कि कई विवाद राजस्व न्यायालय एवं जिला न्यायालय में बढ़ते जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि शासन की मंशा बहुत ही साफ थी कि जो पट्टेदार हैं उन्हें मालिकाना हक दिया जाए और जो अवैध कब्जे दार हैं उन्हें भी विधिवत शुल्क लेकर मालिकाना हक दिया जाए परंतु रायगढ़ में कुछ शातिर पटवारी एवं आरआई जिन्हें रिक्त नजूल भूमि को सूचीबद्ध करने का काम दिया गया था और उसे संरक्षित रखने का काम दिया गया था ताकि उसके विक्रय से शासन के खाते में राजस्व की प्राप्ति हो वे उसे अपनी सल्तनत समझकर नए कब्जेदारो को उकसा कर कब्जा करवा रहे हैं।

इसी आपाधापी में आरआई और पटवारी निजी भूमि मालिकों की भूमि पर भी कब्जा करवाने से नहीं चूक रहे हैं और इस तरह एक दुश्मनी और वैमनस्य का वातावरण तैयार किया जा रहा है। कई सारे नए विवाद सामने आ रहे हैं और लोग राजस्व विभाग और जिला न्यायालय के चक्कर लगा रहे हैं। शासन ने साफ किया था कि निर्धारित तिथि तक जो कब्जे हो गए हैं केवल उन्हें ही इसका लाभ मिलेगा शेष रिक्त भूमि को एक से अधिक खरीददार होने पर अधिक राजस्व के लिए नीलाम करेंगे। परंतु कुछ बाज किस्म के शातिर लोगों ने इसे धंधा बना लिया है यहां तक कि निजी भूमियों पर प्रधानमंत्री आवास योजना के घर बनाने के लिए भी लोगों को उकसाया है। इन पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए इन्हें न केवल निलंबित करना चाहिए बल्कि इनके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही होनी चाहिए यदि ऐसा जिला प्रशासन की तरफ से कोई अंकुश नहीं आता है तो समस्त सबूतों एवं दस्तावेजों के साथ माननीय उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है जिससे इन स्वार्थी पटवारी एवं आर आई तथा इनके पीछे लगे अधिकारी और नेता भी बेनकाब हो सके जो नजूल भूमि को अपने बाप दादा की वसीयत समझकर कब्जा करवा रहे हैं।इस काम का बाकायदा ठेका भी हो रहा है।

इस घटना की मय दस्तावेज एवं फोटो के साथ जानकारी माननीय मुख्यमंत्री राजस्व मंत्री राजस्व सचिव एवं पुलिस मुख्यालय तक भेजी जायेगी। आरटीआई एक्टिविस्ट तैयारी कर रहे हैं कि इस अभियान के पहले जो वीडियो ग्राफी हुई थी उसकी प्रतिलिपि हासिल कर सके ताकि माननीय उच्च न्यायालय में इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सके।








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