04-February-2020


जहां चुनौतियां थी वही बना दिये रास्ते, कैरियर के लिए शहर नहीं गांव को चुना और बन गया सफल ………….. पढ़िए एक युवा कैसे बना उद्यमी



रायगढ़ मुनादी।।

लैलूंगा के आशीष सुदूर गांव तक शिक्षा की अलख जगाने सफर पर निकल पड़े हैं। उन्हें हौसला और ताकत मिली, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना से। इस योजना से प्राप्त ऋण 3 लाख

से उन्होंने आदिवासी बहुल अंचल ग्राम कुंजारा में एकलव्य कम्प्यूटर एजुकेशन आरंभ किया। वे कहते हैं जहां चुनौतियां रही वहीं मैने रास्ते बनाये हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से उन्हें संबल मिला और उन्होंने पथरीली राहों की परवाह नहीं की। आज उनका यह संस्थान इस क्षेत्र का अग्रणी संस्थान बन गया है और दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से युवा उनके संस्थान में कम्प्यूटर की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं तथा सफलता के नये कीर्तिमान रच रहे हैं।

आशीष ने बताया कि देश के प्रख्यात वैज्ञानिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम उनके प्रेरक एवं आदर्श व्यक्तित्व हैं। उनका जीवन हमारे लिए पथप्रदर्शक एवं प्रेरणादायक है। आशीष ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया, अब जाकर उन्हें मंजिल मिली है। तमाम बाधाओं को पार कर अपनी जीवटता, मेहनत, लगन एवं उम्मीद की बदौलत यह सफलता अर्जित की है। असफलताओं से भी इंसान बहुत कुछ सीखता है। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि आज उनके संस्थान में 80 विद्यार्थी है। मेरे लिए प्रसन्नता की बात है कि उनके जीवन को आगे बढ़ाने का मौका मुझे मिला है। उनके संस्थान में युवा विद्यार्थी डीसीए, पीजीडीसीए, टैली, एडीसीए की पढ़ाई कर रहे है, वहीं सीएसआर गर्वमेन्ट प्रोजेक्ट के तहत भी बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वे कई प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होते है और बच्चों को कम्प्यूटर शिक्षा एवं आत्मनिर्भर कैसे बने, इसके लिए प्रोत्साहित करते है। अब मन में एक सुुकून भी है कि बच्चे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से प्राप्त ऋण ने उनकी जिंदगी बदल दी है, जिसकी बदौलत वे आज सक्षम एवं आत्मनिर्भर हैं। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री के प्रति तहेदिल से शुक्रगुजार है।








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