सियासी दांव की मुनादी(राजेश पांडेय)
बीते सोमबार को जशपुर जिले हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद जिले के क्षेत्र क्रमांक 13 ही आखिरी क्षेत्र बचा रह गया था जहाँ से परिणाम आने में घण्टो लग गए और परिणाम आने के बाद भी संशय की स्थिति बरकरार रही आखिर में यह क्लीयर हो पाया कि यहाँ से काँग्रेस समर्थित प्रत्याशी नवीना पैंकरा जीत गयी । सबसे दिलचस्प बात ये कि वोट की गिनती शुरू होते ही इस क्षेत्र के सभी भाजपा नेता मतदान केंद्र स्व तो निकल ही गए मैदान छोड़कर भी भाग गए । एक भी नेता न तो गिनती के दौरान मौजूद रहे न ही वहां तैनात किसी भी नेता का दूरभाष चालू रहा ।पूछने पर पता चला कि पार्टी के बाहरी नेता भी इनसे सम्पर्क करने की कोशिश में लगे रहे लेकिन उन्हें भी संपर्क करने में सफलता नही मिली ।आस पास के नेताओं से संपर्क करने पर पता चला कि जिस भाजपा नेता को बूथ एजेंट बनाने की जिम्मेदारी मिली थी और जिंनके पास बूथ एजेंट के नम्बर थे वही नेता अपना मोबाइल कर दिया और उससे सम्पर्क स्थापित करने में सभी के पसीने छूट गए। जिले के अन्य भाजपा नेताओं से जब जीत हार के आंकड़े लेने सम्पर्क साधा गया तो उनके जवाब चौकाने वाले थे ।उन्होंने बताया कि वे खुद संपर्क करने में लगे हैं लेकिन उनका भी किसी से संपर्क नही हो पा रहा है। यह बात समझ से परे है कि चुनाव से पहले इस क्षेत्र से जीत के बड़े बड़े दावे करने वाले स्थानीय नेता आखिर परिणाम आने से पहले मैदान छोड़कर क्यों भाग गए?क्या मैदान छोड़ना उनके भीतरघात रणनीति का हिस्सा था और विरोधी दल से पोलटिकल फिक्सिंग हो गयी थी ?इन सारी संभावनाओं से इनकार इसलिए नही किया जा सकता क्योंकि इसी क्षेत्र के दूसरे हिस्से (तपकरा क्षेत्र क्रमांक 14)से पार्टी नेताओं द्वारा जमकर भीतरघात और भाजपा समर्थित प्रत्याशी को हराने भारी षड्यंत्र का खुलाशा खुद यहाँ के कार्यकर्ता कर चुके है को सोशल मीडिया की सुर्खियों में है ।
यह बताना जरूरी है कि इस क्षेत्र से छग के बड़े राजनीतिक परिवार जनजातीय आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकुमार साय की बहू साधना साय को भाजपा ने समर्थन देकर मैदान में उतारा था और इनके विपक्ष में काँग्रेस की ओर गैर राजनीतिक छवि की महिला प्रय्याशी नवीना पैंकरा मैदान में थी और नवीना पैंकरा 1964 वोट से चुनाव जीत गयी ।

