रायगढ़ मुनादी
शहर के रामलीला मैदान में सीएए एनआरसी के विरोध और शाहीन बाग आंदोलन के समर्थन में 8 वें दिन भी जारी रहा। आज भी वक्ताओं ने भारी मन से धर्म निरपेक्ष देश को बांटने की साजिश के तहत एनआरसी लाकर अल्प संख्यको को संदेही करार देने षड्यंत्र बताते हुए सारगर्भित उद्बोधन दिया।
शहर के जाने माने सामाजिक आंदोलन के प्रणेता जैसे चेहरे भी माइक संभाले और लड़ाने वाले देश को बांटने वाले के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया और कहा कि वह समय दूर नहीं जब हिन्दू बहोत ज्यादा दिन तक इनके बहकावे में नही आने वाले।
आठवें दिन सीएए एनआरसी के विरोध में और शाहीन बाग के समर्थन में शहर की बेटियों ने भी माइक थामा और अपनी कविताओं के माध्यम से मुस्लिमो को दोयम दर्जे का बनाने की नीति का पुरजोर तरीके से विरोध किया। इस दौरान शहर की बेटियों के लिए पंडाल में जमकर तालियां बजी और उनके जज्बे को हर किसी ने सराहा।
हमे किसी मुस्लिम देश का समर्थन बीलकुल नही चाहिए हमें भाई चारे के बीच रहने दें। जहां तक शाहीन बाग का सवाल है तो शाहीन उस चिड़िया का नाम है जो शिकार करती है लेकिन वह कभी शिकार नही होती है।
तुम तो हमारे हुक्मरान हो, तुम्हे तो हमारे साथ होना था अब जाने कहा चले गए और ये क्या कर दिया तुमने हिंदुस्तान को जो आज रो रही हैं माएँ।
आज धर्म पूछोगे कल जात पूछोगे और घुमा फिरा कर हमारा भी वही जवाब होगा जिसे तुम बार बार घुमा घुमा कर वही बात पूछोगे हम यही कहेंगे हिंदुस्तान वतन मेरा है। मुझे केसरिया नही सिर्फ तिरंगा दिखता है ये वतन मेरा है हम बार बार यही जवाब देंगे। ऐसी कविताओं से पूरे पंडाल में जोश और उमंग बढ़ गया।
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