09-February-2020


इन दो चेहरे के बीच फंस सकती है जिला पंचायत अध्यक्ष की पेंच, भाजपा भी ठोंकेगी ताल, पढ़िए जिला पंचायत की सियासत की गणित का क्या है फार्मूला



जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए फंस सकता है पेंच, तो फिर कैसे लगेगी नैय्या पार, उपाध्यक्ष के लिए कौन होगा चेहरा ….

रायगढ़ मुनादी।

जनपदों के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष के चेहरे को लेकर राजनीतिक हलकों में घमासान मचा हुआ है। दरअसल जिला मुख्यालय का अध्यक्ष अहम माना जाता है। जनपदों में अध्यक्ष उपाध्यक्ष के लिए जोड़ तोड़ को देखते हुए सभी जनपद सदस्यों को पूरी टूर सहित अन्य सुरक्षित जगहों पर भेज दिया गया है।
जिला मुख्यालय अध्यक्ष ऐसा होना चाहिए जो सभी जनपद सदस्यों को भी संतुष्ट कर चल सके क्योंकि जनपदों से होकर गांव की गलियों में विकास की धारा जिला से होकर ही गुजरती है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए यूं तो एक सर्वमान्य चेहरा निराकार पटेल को माना जा रहा है लेकिन विधायक के भाई कैलाश नायक भी इसकी दौड़ में शामिल है लेकिन एक चेहरा और भी है जो अध्यक्ष की दौड़ में अपने आप को शामिल किया रखा है और अध्यक्ष की दौड़ से बाहर रखने की वजह से बागी होकर समीकरण बिगाड़ने का माद्दा रखती है। और या दावेदार बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होकर कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है। कहा जा रहा है कि अध्यक्ष के प्रलोभन में ही बसपा छोड़ कांग्रेस का दामन थामा था अब मामला इसी वजह से पेंच फसता दिख रहा है।

वही पुरे घटनाक्रम पर भाजपा की गिद्ध नजर लगी हुई है ऐसी कुछ जरा सी भांस लगते ही तुरंत लपकने तैयार हैं। जरा सी खुसखास लगने पर जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर मैदान में कूद जाएगी।

ऐसे में राजनीतिक समीकरण बनाने की बात कही जा रही है अध्यक्ष के लिए जहां कैलाश नायक की दावेदारी जो अध्यक्ष नही बनने की स्थिति में अपने समर्थकों के साथ बगावत कर सकते हैं। राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि निराकार पटेल मंत्री उमेश पटेल की पहली पसंद है और उन्हें ही जिला पंचायत अध्यक्ष की ताजपोशी कराना चाहते है और यह तय भी माना जा रहा है। जहां तक उपाध्यक्ष की बात है तो यह सेहरा कैलाश नायक के सर बंध सकता है लेकिन इसके आगे महिला जिला पंचायत श्रीमती जयसवाल के पति विजय जयसवाल उपाध्यक्ष के लिए अड़ सकते हैं। और यही पर भाजपा मौका पाते ही सेंध लगा सकती है।
फिलहाल राजनीतिक हलकों में जिला पंचायत अध्यक्ष निराकार पटेल और उपाध्यक्ष कैलाश नायक के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। जहां तक बसपा छोड़ कर कांग्रेस में आई विजय जयसवाल की पत्नी को मना लिए जाने की बात कही जा रही है।

जिले की बॉडी में अहम पद से भी संतुष्ट किये जाने की बात सामने आ रही है। चाहे ऐसे में कांग्रेस की राह जितनी आसान दिख रही है वैसा उतना है नहीं कुछ भी उलटफेर हो सकता है।








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