रायगढ़ मुनादी।
केंद्र सरकार द्वारा समग्र विकास योजना के तहत खेल गड़ी के नाम पर प्राथमिक स्तर से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूलों में खेल को प्रोत्साहित करने करोड़ो रुपय की राशि राज्य सरकार को प्रदाय की गई है हायर सेकेंडरी स्कूलों में 25 हजार रुपये की राशि पर स्कूल दी गयी है पिछले वर्ष भी इसी तरह राशि दी गयी थी तब राजनीतिक रूप से संरक्षण प्राप्त लोगो द्वारा जशपुर जिले में दबाब डाल कर बाहरी फर्मो द्वारा 6 से जुड़े नेताओ की तिरछी नजर पड़ चुकी है और अधिकारियों पर दबाव बना कर ब्यक्ति बिशेष फर्म से खरीदी करने दबाव बनाया जा रहा है।
रायगढ़ जिले के नंदेली ओर कोतरा हायर सेकेंडरी स्कूलों में सैनी ब्रदर्स नामक फर्म अम्बिकापुर के द्वारा दिये गए बिल से स्पष्ठ प्रतीत होता है कि उक्त योजना की राशि पर सत्ता से जुड़े नेताओ की तिरछी नजर पड़ चुकी है और अधिकारियों पर दबाव बना कर ब्यक्ति बिशेष फर्म से खरीदी करने दबाव बनाया जा रहा है।
रायगड़ जिले में स्पोर्ट्स ओर स्टेशनरी की बड़ी दुकानों के होने के बाद भी 300 किलोमीटर दूर अम्बिकापुर की एक फर्म बिशेष से मात्र 25 हजार की खेल सामग्री की खरीदी स्पष्ठ बताता है कि प्रचार्यो पर किस कदर दबाव बनाया जा रहा है।
यह सब आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है जिससे स्कूल प्रबंधन स्थानीय विक्रेताओं को छोड़ कर 300 किमी दूर के कारोबारी से सामान क्रय भंडारण नियम को ताक पर रख खरीदी कर रहे है और भ्र्ष्टाचार की एक नई इबारत लिख रहे हैं।
बजार से 10 गुना अधिक रेट अधिक दर की जा रही है खरीदी
बिल के अवलोकन करने पर स्पष्ठ प्रतीत होता है कि कैरम बोर्ड जो 1 हजार से नीचे आता है उसे 3 हजार में क्रय किया जा रहा है
विक्की का टेनिस बाल जो 50 रुपय में खरीदी की जाती है ओ 110 रुपय में खरीदा जा रहा है क्रिकेट के टेनिस बैट 300 से 500 तक आ जाते है उसे 900 रुपय तक प्रदान किया जा रहा है
फुटबाल kasko 900 रुपय लिखा गया है जो कि 500 के भीतर ही खरीदी हो जाती है जिसे 900 का बिल दिया गया है सभी सामग्रियों के रेट का आकलन किया जाए तो जम कर भस्टाचार की बू आ रही है।
सबसे बड़ा सवाल आखिर यहाँ के प्रचार्य 300 किलोमीटर दूर जा कर कैसे खरीदी कर रहे है ?
फर्म द्वारा स्कूलों में दिये गये बिल में डेट भी अंकित नही किया जा रहा है और ना ही जीएसटी लगाया जा रहा है सरकार को भी लाखों रुपये का चूना लगाने की तैयारी की जा रही है।
मार्गदर्शी निर्देश के बिंदु 1 में स्पष्ट उल्लेख है स्थानीय स्तर और क्रय करे जबकि रायगढ़ के स्कूल अपने आस् पास के हजारों दुकान को छोड़ कर अंबिकापुर के फर्म से ले रहे हैं।

