रायगढ़ मुनादी।।
केवल नालियों को खोल कर और तोड़फोड़ करके सुर्खियां बटोरने से न शहर का भला होने वाला है और न संजय काम्प्लेक्स के व्यापारियों का । जरूरत इस बात की है कि नगर निगम व्यवस्थापन की कानूनी प्रकिया अपना कर वहां पसरा व्यापारियों को व्यवस्थित दुकान बना कर दे। आपसी भरोसे को कायम करने के बाद पूरे बाजार को पहले इतवारी बाजार में शिप्ट करे और संजय काम्प्लेक्स को बहुमंजिला बाजार में बदल दे। यह एक वृहद कार्ययोजना है जिसमे व्यापारियों को भी दो कदम आगे बढ़ना होगा। कोर्ट का स्टे ले कर वो भी दशकों से शहर विकास को अवरुद्ध कर रहे है यह जायज नही है।
उक्ताशय की प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए भाजपा नेता आलोक सिंह ने कहा है कि हप्ते भर के भीतर ही संजय काम्प्लेक्स में बेजाकब्जा पूर्ववत होने लगे है। आवाजाही का रास्ता फिर सकरा और गंदगीयुक्त हो गया है। निगम की कवायद महज औपचारिकता बन कर सामने आई है। जबकि जरूरत समस्या के स्थायी निदान की है जिससे शहरवासियों को सड़ांध, कीचड़ और बीमारियों से लिपटी सब्जियां न खरीदनी पड़े।
आलोक सिंह ने कहा है पिछले दिनों नवनिर्वाचित सभापति जयंत ठेठवार से इस विषय पर उनकी लम्बी चर्चा हुई। बातचीत में यह स्पष्ट हुआ कि सभापति की सोच और उनकी सोच में बेहद समानता है। श्री सिंह ने उनसे कहा कि संजय काम्प्लेक्स की वर्तमान पसरा मंडी अब प्रासंगिक नही रही। इस पूरी जमीन पर नगर निगम भूतल पर पार्किंग एवं फेंकी गई सब्जियों से जैविक खाद बनाने का संयंत्र स्थापित करे जबकि प्रथम तल पर एक साइज की दुकानें निकाल कर वर्तमान काबिज व्यापारियों को व्यवस्थापन योजना में निशुल्क दुकानें आबंटित करे। जबकि द्वितीय तल पर बनी दुकानों की आम नीलामी करके संजय काम्प्लेक्स के नवनिर्माण की लागत वसूल करे। सिद्धांततः इससे सभापति सहमत हुए। हलाकि वो यातायात दबाव को देखते हुए दुकान की संख्या बढ़ाने के पक्ष में नही थे।
आलोक सिंह ने कहा है कि इस प्रक्रिया में व्यापारियों का भरोसा जीतना एक टेढ़ी खीर है। गुटों में बटे यहां के व्यापारी संघ की अपनी अपनी सोच है। कुछ बड़े व्यापारियो के निजी स्वार्थ और बड़े कब्जे छिन जाने का भय उन्हें दूसरे व्यापारियों को भड़काने का मौका देता है वही कहा जाता है कि मंडी में कुछ व्यापारी ऐसे भी है जो एक से अधिक पसरो के मालिक है और पसरो से किराया भी वसूलते हैं यदि नव निर्माण हुआ तो उनका यह अवैध व्यापार छीन जाएगा। सभापति महापौर इनका भरोसा कैसे जीतेंगे यह आगे देखने को मिलेगा।
उनका कहना है कि व्यापारियों में भरोसे की कमी का एक बड़ा कारण पिछले दिनों की गई तोड़फोड़ की आतताई प्रक्रिया भी है जिसमे डंडा हावी रहा। बात करने की कोशिश करने गए मंजुल दीक्षित जैसे युवा नेता पर आधा दर्जन गैर जमानती धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया। यह ठीक नही हुआ। यह सब जोगी शासन के आतंक जैसा है जिसने कांग्रेस को 15 साल सत्ता से दूर रखा। भूपेश बघेल का प्रशासन भी उसी रास्ते पर है।
बहरहाल शहर सरकार यदि वास्तव में संजय काम्प्लेक्स का उद्धार करना चाहती है तो संजय काम्प्लेक्स के व्यापारियों के समक्ष अपनी योजना का ब्लू प्रिंट रखे और पहले से यह बताये कि नव निर्माण की डिजाइन क्या होगी ? दुकानों का साइज क्या होगा ? साथ ही आश्वस्त करे कि जो व्यापारी फ्रंट में काबिज है उसे नव निर्माण में फ्रंट की ही दुकानें मिलेगी। दूसरी तरफ व्यापारियों को भी शहर सरकार पर भरोसा करना होगा। उन्हें यह भी तय करना होगा कि पसरो के भौतिक सत्यापन के समय वो एक पसरे को तीन पसरे में बदल कर तीन दुकान पाने की हवस अपने दिमाग मे पैदा न करे। तब ही उन्हें व्यवस्थित आधुनिक बाजार में व्यापार करने का मौका मिल सकता है। खास कर सब्जी विक्रेता यह सोचे कि उन्हें कोई हक नही है कि वो पैसे लेकर शहर की जनता को जर्म्स वाली बीमारियों से युक्त सब्जी खिलाये। कीचड़ सड़ांध,और गंदगी से सराबोर संजय काम्प्लेक्स के नव निर्माण के लिए ताली दोनो हाँथ से बजाने की जरूरत है। विपक्ष के नाते हमारे जैसे भाजपाई सदैव व्यापारियों के साथ ही खड़े रहेंगे पर व्यापारियों को भी यह तय करना होगा कि वो शहर विकास के आड़े न आये।

