घरघोड़ा मुनादी।
घरघोड़ा नगर पंचायत के नये परिषद की कल पहली बैठक काफी हंगामेदार रही जिसकी चर्चा पूरे नगर में होती रही बैठक शुरू होते ही सुरेंद्र चौधरी पार्षद वार्ड 11 ने एक आवेदन दिया जिसमें 7 पार्षदों के हस्ताक्षर थे जिसमे उल्लेख था कि बिना प्राकलन के प्रस्ताव गैर वाजिब हैं । परन्तु उक्त समर्थन पत्र में हस्ताक्षर करने वाले पार्षदों ने अपने वार्ड के विकास कार्यो का प्रस्ताव सामने रखा और वार्ड 11 के पार्षद द्वारा पेश किये गए उनके हस्ताक्षरित पत्र से विपरीत जाकर वार्डो में विभिन्न निर्माण कार्यो के लिए प्रस्ताव पेश किया ।
7 बिंदुओं के प्रस्ताव व विरोध का ये है असली माजरा
दरअसल पूरे हंगामे की असली वजह थी बैठक के 7 बिंदुओं पर वार्ड 11 के पार्षद द्वारा 7 पार्षदों का हस्ताक्षर युक्त विरोध पत्र जिसे वो नियम कानून का हवाला देकर सही साबित करने में अड़ गए थे । नप अधिकारी द्वारा जारी पत्र के बिंदु क्रमांक 1 में नगर विकास हेतु पार्षदों द्वारा किये गए अनुसन्धित विकास कार्य पर निर्णय के विरोध में विरोधपत्र में उल्लेख किया गया है कि आर्किटेक्ट नियुक्त कर वार्ड विकास का मास्टर प्लान तैयार किया जाये और प्राकलन तैयार किया जाये । इस पर अध्यक्ष का कहना था कि आप अपने वार्ड के विकास कार्यो के सम्बन्धी मांग का ब्यौरा दे ताकि उस पर प्राकलन करा कर प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजा जा सके । वही बिंदु 2 व 3 में सामाजिक सुरक्षा के आवेदनों के स्वीकृति को अन्य सभी आवेदनो के आते तक स्थगित रखने की बात कही गयी है जबकि इन मामलो में आगामी आवेदनों के इंतजार तक प्राप्त आवेदनों को निराकृत न करने की बात हास्यास्पद जान पड़ती है क्योंकि तत्सम्बन्धी आवेदन सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हुए हैं जिसके आकस्मिक मृत्यु,विधवा पेंशन जैसे वजहों से सहायता राशि दी जाती है इसलिए प्राप्त आवेदन पर स्थगन लगाने कहना कहीं से भी उचित जान नही पड़ता ।इसी तरह बिंदु 6 में ग्रीष्म ऋतु में पेयजल व्यवस्था के सम्बन्ध में उल्लेख करते हुए मास्टर प्लान बनने तक इस विषय को स्थगित करने कहा गया है जबकि ग्रीष्म ऋतु नजदीक है और पेयजल की समस्या से पिछले वर्ष कई वार्ड प्रभावित रहे ऐसे में इस पर कार्य योजना बननी आवश्यक है ।
'चित भी मेरी पट भी मेरी' से विकास पर लगेगा ग्रहण
नगर में नई नगर सरकार की आमद के साथ ही विकास की नई इबारतें लिखी जाने की बातें खूब चर्चा में रही हैं ऐसे में नप की प्रथम बैठक से सभी को बहुत उम्मीदें थी परंतु यहां 'चित भी मेरी पट भी मेरी' की पराकाष्ठा ने जता दिया की विकास की राह इतनी भी आसान नही होने वाली है । फ़िलहाल पार्षदों को समझना होगा की जनता ने उन्हें नगर विकास के लिए चुना है न की नियम कायदों को वकीलों की तरह दलील बनाकर अपना वर्चस्व साबित करने के लिए । अब देखने वाली बात होगी की अगली बैठक में विकास कार्यो की ओर बढ़ते कदमो को कितनी चपलता मिल पाती है या उलझनों का नया मायाजाल गढ़ फिर से जनता की उम्मीदों पर पानी फेरा जाता है ये आने वाला वक्त ही बताएगा ।
मंदिर का विरोध क्यों ???
विरोध में प्रस्तुत आवेदन में बिंदु 7 में नप के सामने मंदिर निर्माण पर आपत्ति जताई गई है । बिंदु 7 में मंदिर निर्माण के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि यह छोटे झाड़ के रूप अभिलेखों में दर्ज है । अगर ऐसा है तो इसका अर्थ आस पास के सभी शासकीय कार्यलय भी छोटे झाड़ के रूप में दर्ज होंगे तो प्रश्न उठना लाजमी है कि कार्यालय भवन बनने पर आपत्ति नही की जाती पर मंदिर बनने की बात पर अभिलेख की दलील देकर विरोध किया जाता है ।

