जशपुर मुनादी//
जशपुर जिले में स्कूल फंड में कमीशनखोरी का मामला तूल पकड़ रहा है ।बिगत दिनों फेडरेशन के द्वारा कलेक्टर से लेकर जिला शिक्षाधिकारी तक सौंपे गए ज्ञापन पर अबतक कोई कार्यवाही नही होने से कमीशन की हकीकत उजागर होने लगी है। जिला शिक्षाधिकारी एन कुजुर ने बताया कि फेडरेशन के द्वारा दिये गए ज्ञापन के आधार पर जिले के समस्त बीईओ को उनके द्वारा नोटिस जारी कर 3 दिवस के भीतर जवाब मांगा गया था लेकिन जिले के एकाध बीईओ को छोड़ अबतक किसी ने भी डीईओ के नोटिस का जवाब नही दिया है ।जिलाशिक्षाधिकारी ने बताया कि नोटिस का जवाब आने के बाद आगे की कार्यवाही होगी। यह बताना जरूरी है कि यह मुद्दा 11 फरवरी को सोशल मीडिया में तब उजागर हुआ जब फेडरेशन ने कलेक्टर ,सर्व शिक्षा अभियान ,और जिलाशिक्षाधिकारी लिखित में ज्ञापन सौंपा ।इनके ज्ञापन सौंपने के बाद जिला प्रशासन और जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा मामले की जाँच के लिए जांच टीम बनाया गया और जांच टीम का मुखिया बीईओ को बनाया गया लेकिन अगले ही दिन जिला शिक्षाधिकारी के द्वारा सभी बीईओ को नोटिस जारी कर बीईओ को भी कमीशनखोरी के खेल में संलिप्त बताते हुए उन्हें नोटिस जारी कर 3 दिवस के भीतर जवाब देने को कहा गया लेकिन अबतक एक पखवाड़ा होने को है न तो बीईओ की ओर से जिकाशिक्षाधिकारी को कोई जवाब दिए गए न ही इस मामले में कोई कार्यवाही ही हुई है। बताया जा रहा है कि कमीशनखोरी का खेल उजागर होने के बाद पूरा विभाग इस खेल को रोकने के बजाय मामले की लीपा पोती में जुट गया है और कही विभाग की ही फजीहत न हो जाय इसलिए प्रधानपाठकों पर बयान बदलने के लिए दबाव बनाए जा रहे हैं । शालाओं के सूत्रों की माने तो पहले बड़े अधिकारियों के नाम पर शाला फंड में आये 25 हजार एवम खेलगढिया फंड के 5 हजार से 20 प्रतिशत की राशि कमीशन के तौर पर मांगा गया और बड़े अधिकारियों का धौंस दिखाकर प्रधानपाठकों को कार्यवाही का डंडे भी दिखाये जा रहा है।सूत्रों की माने तो कमीशन का खेल उजागर करने वाले प्रधानपाठकों के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने की बात शुरू हो गयी है । विभाग के सूत्रों के अनुसार इन पर इसलिए कार्यवाही हो सकती है क्योंकि फंड आने से पहले और फंड आने के बाद फंड की उपयोगिता को लेकर स्कूल में समतियाँ बनाई गई है और उचित तरीके से खर्च करने कई निर्देश जारी किए जा चुके है इसके बावजूद प्रधानपाठकों के द्वारा अगर किसी को फंड की राशि से कमीशन दिये जा रहे हैं तो पूरी जिम्मेदारी प्रधानपाठकों की होगी क्योंकि फंड की सुरक्षा और उपयोगिता के लिए बनाई गई समितियों के अध्यक्ष प्रधानपाठक ही होते हैं। विभाग से जुड़े अधिकारियो की माने तो शासन द्वारा जारी फंड की सुरक्षा और खर्च की जिम्मेदारी प्रधान पाठक की होती है इस तरह फंड में गड़बड़ी का जिम्मेदार भी प्रधान पाठक होगा । खैर,कमीशन के इस खेल में अब नया ट्विस्ट आ गया है ।अधिकारी अपनी गिरेबान बचाने के लिए नियम कानून का डंडा लेकर प्रधानपाठकों के सिर पर सवार हो गए है और इस मामले में उन प्रधानपाठकों की गर्दन फंसती दिख रही है जिन्होंने कमीशन का नजराना पेश कर दिया है । बहरहाल,इस खेल में शामिल कई चेहरों का खुलाशा हो सकता है ।बने रहिए मुनादी डॉट कॉम के साथ....

