जशपुर मुनादी।।
आज सुबह सुबह भारत के वे महापुरुष जो देश के अस्मिता हैं और आजादी के महानायक रहे हैं वे बगीचा के एक स्कूल के कूड़े कचरे की ढेर में मिले हैं। इन महापुरुषों में एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बापू, संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर, स्वामी विवेकानंद जी, सर्वपल्ली डॉ राधाकृष्णन के अलावा राष्ट्रगान के रचयिता रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीरें हैं जो प्राथमिक शाला झाँपीदरहा के पीछे कूड़े करकट के रूप में कचरे की ढेर में पड़ी हुई मिली हैं। बड़ी बात यह भी है कि ये जो तस्वीरें है वे छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के द्वारा स्कूलों में लगाने के लिए भेजी गयी थी। जिसे नवनिहाल देश के अपने महानायकों को जान सकें, पहचान सकें। जिसे सुबह सुबह ग्रामीणों ने स्कूल के कचरे की ढेर में देखा और पूरे गांव में हड़कंप मच गया। साथ ही ग्रामीणों में आक्रोश भी है।
सबसे बड़ी बात यह है कि ये वो शासकीय स्कूल हैं जो देश की नौनिहालों एवं नई पीढ़ी को दशा और दिशा देते हैं, मगर जिस तरह भारत की आजादी के महानायक और देश के महापुरुष जो इस देश की अस्मिता हों, और इस नए भारत को उनके आदर्श नित नया आयाम देकर इस पीढ़ी को सुपुर्द किया गया हो, और उनका सम्मान ही शासकीय संस्थाओं के दायित्व में ऐसा है तो सवाल यही खड़ा होता है कि महापुरुषों के सम्मान के साथ से जुड़ा देश का सम्मान और अभिमान इस तरह तार-तार क्यों हो रहा है। बात यह भी कि उस विभाग की सोच और उस शाला में कुंठा का कैसा अवसाद होगा, जो घटित इस घटना से बेहतर समझा जा सकता है। अगर बात यह भी कि इनको अगर डिस्मेंटल करना भी था तो इन महापुरुषों के इन तस्वीरों को डिस्मेंटल करने का कोई ससम्म्मानित तरीका विभाग एवं शाला के पास नहीं था।

