रायगढ़ मुनादी।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम में सूचना का अधिकार को लेकर जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। यहां जन सूचना अधिकारी द्वारा सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगे जाने पर गुमराह करते हुए धारा का हवाला दिया जाता है। और यह कहा जाता है कि मांगी गई नही दिया जा सकता है।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम में पदस्थ प्रबन्धक जेपी सिंह लंबे समय से यहां पदस्थ हैं और उनके यहां पदस्थापना के दौरान भारी गड़बड़ी की बू आ रही है। दरअसल सूचना का अधिकार के तहत उनसे मांग की गई थी कि कितने श्रमिको का पिछले तीन सालो में ईएसआई में पंजीयन हुवा है और ऐसे कितने श्रमिक हैं जिनका पंजीयन मृत्यु दिनांक या मृत्यु के बाद पंजीयन हुवा है।

जन सूचना अधिकारी द्वारा सूचना का अधिकार 2005 के अधिनियम की धारा 8 (1) (j) का हवाला देते हुए कहा जाता है कि इस नियम के अनुसार जानकारी नही दी सकती, दो लाइन लिखकर जानकारी देने से मना कर दिया जाता है। जबकि इसी नियम के आगे दूसरे पैरा में यह भी कहा गया है कि जो जानकारी लोक सभा, विधान सभा, राज्य सभा व विधान परिषद के सदस्य को दी जा सकती है उस जानकारी को आम जनता को दिए जाने से इनकार यानि जानकारी से वंचित नही किया जा सकता है।
इससे साफ जाहिर है कि विभाग में सूचना का अधिकार अधिनियम का जमकर मखौल उड़ाया जा रहा है। बता दें कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा श्रमिक ठेकेदारों और कारखाना प्रबन्धक से मिली भगत कर बड़ी संख्या में मृत्यु के बाद ईएसआईसी में पंजीयन किया जाता है और बड़ी संख्या में फैक्ट्री के श्रमिक ठेकेदारों और कारखाना प्रंबधको के साथ मिली भगत कर नियम विरुद्ध जाकर न सिर्फ पंजीयन किया गया है और शासन की करोड़ो रूपयों का नियम विरुद्ध बंदरबाट कर दिए हैं। कई ऐसे मामले हैं जिसमें कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा नियम कानून को ताक पर रखकर दुर्घटना में मृत्यु के बाद श्रमिक का ईएसआई सी पंजीयन का लाभ दिया गया है और यह सब ठेकेदार और कारखाना प्रबन्धको के साथ सांठगांठ कर किया जाना बताया जा रहा है। और यही वजह है कि इस तरह की जानकारी मांगे जाने पर धारा 8 (1) (j) का हवाला देकर जानकारी से वंचित किया जाता है ताकि उनके भ्र्ष्टाचार की पोल न खुल जाए।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम चूंकि केंद्र सरकार के अधीन आता है इसलिए इसकीं शिकायत सीधे सेंट्रल मिनिस्टर और सेक्रेटरी के साथ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से करने की बात कही है। अधिकारी जेपी सिंह के पदस्थापना से लेकर अब तक के ईएसआईसी श्रमिको के पंजीयन और मृत्यु दिनांक की पंजीयन की पूरी जांच हो तो सब कुछ साफ हो जाएगा।


