रायगढ़ मुनादी।
फरवरी के पहले सप्ताह में चक्रधरनगर बस स्टैंड स्थित एक रसूखदार व्यापारी के अवैध निर्माण पर प्रशासन का बुलडोजर चला था। तोड़फोड़ के दौरान व्यापारी ने सुनियोजित तरीके से खुद तोड़ने के लिए 3 दिन की मोहलत मांगी थी। लेकिन अब महीने भर से अधिक हो जाने के बाद भी न तो अवैध निर्माण कर्ता अशोक मेहानी ने अवैध निर्माण तोड़ा और ना ही प्रशासन ने उधर झांकने की जहमत उठाई। जो शहर में जबरदस्त चर्चा का विषय भी बना हुआ है। एक तरफ निगम सड़क से अतिक्रमण हटाने के नाम पर छोटे व्यवसायियों की दुकानें हटा रहा है। दूसरी तरफ रसूखदारों की दो मंजिला अवैध इमारतें शहर के बीच चौराहों पर खड़ी हैं।


बता दे कि शहर में प्रशासन के तोड़फोड़ को लेकर जो कार्रवाई की गई वह चर्चाओं में है और उनकी अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई की मंशा पर भी सवालिया निशान लगा रही है। कहा जा रहा है कि ये कार्रवाई का भय दिखाकर सिर्फ और सिर्फ कमाई का जरिया बनाया जा रहा है। जो कई जगहों पर इसे प्रमाणित भी करता है। इसका स्वच्छ उदाहरण चक्रधरनगर बस स्टैंड स्थित कैलाश मेहानी द्वारा एक टूटे फूटे झोपड़ी नुमा होटल को जो किसी दूसरे के कब्जे में था उसे छल व बल पूर्वक हड़प कर उसमें दो मंजिला व्यवसायिक परिसर बना लिया जाता है। और प्रशासन को अपने रसूख के दम पर घुटने टेकने को मजबूर कर देता है। यह कहना जरा भी अतिशयोक्ति नही होगा यही वजह है कि अवैध निर्माण को आगे निर्माण करने से रोकने के बजाय निर्माण को पूरा करने प्रशासन सहयोग दे रहा है।

यही वजह से की प्रशासन के तोड़ू दस्ता जिसमे एसडीएम, निगम आयुक्त समेत तमाम निगम के अधिकारी कर्मचारियो की मौजूदगी में तोड़फोड़ किया गया था आज उस जगह पर धड़ल्ले से निर्माण किया जा रहा है बाहर से प्लास्टिक का तिरपाल ढक कर अंदर ही अंदर निर्माण को जल्द से जल्द पूरा करने बकायदा मोहलत दी गई है। अंदर काम करते मजदूर देखे जा सकते है और जिस जगह पर जेसीबी से तोड़फोड़ किया गया था उस पर आगे निर्माण कर दिया गया है, अन्यथा किसकी इतनी मजाल है जो प्रशासन के आदेश और निर्देश को धता बताकर अवैध निर्माण को न तोड़े।


