06-March-2020


जो खेल समझ मे न आये समझ लो खेलगढ़िया है !जशपुर में नही थम रहा विवाद !खेलगढिया के पचड़े में फंस गया एक पत्रकार !पढ़िये पूरी खबर जानिए पुरा माजरा



जशपुर मुनादी।

सरकार द्वारा स्कूली बच्चों का सर्वांगीण विकास करने के लिए चलाये जा रहे खेलगढिया योजना को लेकर विवाद थमने का नाम नही ले रहा है ।इस बार खेलगढिया योजना को लेकर सोशल मीडिया अलग तरह का विवाद शुरू हो गया है। दरअसल नए विवाद की शुरुआत 4 मार्च से हुई जब कोई पत्रकार जशपुर जिले के सराईपानी प्राथमिक शाला पहुंच गया और वहाँ के प्रधानपाठल से खेलगढिया योजना को लेकर सवाल पूछने लगा लेकिन प्रधानपाठक ने पत्रकार के सवालों का जवाब नही देकर सीधे बगीचा थाना चला गया और पत्रकार के विरुद्ध जबरन पैसा वसूली की शिकायत कर दी।शिक्षक लजीत कुजुर का कहना है कि पत्रकार कैमरा लेकर उनके क्लास रूम में पहुंच गए और प्रधानपाठक को स्टाफ रूम में बुकाकर उनसे खेलगढ़िया योजना से संबंधित सवाल करने लगे ।स्कूल टाईम होने के चलते शिक्षक ने जवाब देने से मना कर दिया तो पत्रकार उंनसे 5-10 हजार रुपये की मांग करने लगा और नौकरी खा जाने की धमकी देने लगा ।इस बात की शिकायत शिक्षक ने न केवल थाना बल्कि बगीचा बीईओ को भी किया ।इस मामले में कार्यवाही क्या हुई ये तो पता नही है लेकिन अब इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया में बहस जरूर शुरू हो गयी है।इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एक पत्रकार ने फेसबुक में बगीचा में खेलगढिया योजना के तहत खरीददारी किये गए सामानों का एक बिल पोस्ट किया है।इस बिल की खाशियत ये है कि इसमें बिल धारक का नाम केवल प्राथमिक शाला लिखा गया है ,कौन से प्राथमिक शाला द्वारा खरीददारी की गई है उसका कोई उल्लेख नही है वही इस पोस्ट को देखकर बिल के फिगर पर भी लोग आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं क्योंकि सभी सामानों का मूल्य राउंड फिगर में है और 5000 का बिल है ।उक्त पत्रकार ने पत्रकार के खिलाफ़ थाने में हुई शिकायत को लेकर प्रदेश के शिक्षामंत्री से सवाल भी पूछा है कि क्या खेलगढिया को लेकर सवाल पूछना अपराध है ?
आपको बता दें कि प्रदेश में खेलगढिया योजना लागू होते ही पूरी योजना विवादों में आ गयी थी क्योंकि एक ही दुकान से प्रदेश के समस्त स्कूकों को सामान खरीदने दबाव बनाया जा रहा था जो सोशल मीडिया और मीडिया में लीक हो गया और काफी लंबे समय तक यह मामला सोशल मीडिया की सुर्खियों में रहा ।इसके बाद जब दूसरी बार इस वर्ष इस योजना के तहत स्कूलों में फंड आये तो शिक्षक संघ( फैडरेशन)ने सीधा सीधा इस योजना को कमीशनखोरी के खेल से जोड़ दिया जिसकी जांच सम्भवतः आज भी हो रही है ।
ऐसे में सवाल ये भी जायज है कि इस योजना को लेकर सवाल क्यों न पूछा जाए और सवाल पूछने पर जवाब देने के वजाय सवाल पूछने वालों के विरुद्ध शिकायत हो ये कैसा लोकतंत्र है ?








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