लिखित में दिया ये आश्वासन तबजाकर ग्रामीण माने, अन्यथा एसईसीएल को भारी क्षति का करना पड़ता सामना ….
रायगढ़ मुनादी।
एसईसीएल के बरौद माइंस प्रबन्धन के द्वारा चक्का जाम कर दिए जाने के बाद अंततः घुटने टेकने को मजबूर हुए। सुबह से टेरम गांव के पास ग्रामीणों द्वारा कोयला परिवहन से निकलने वाली खतरनाक धूल वायु प्रदूषण से हलाकान रहे। आज जब पूर्व छात्र नेता राजेश बेहरा के अगुवाई में ग्रामीणों ने चक्का जाम कर दिया तो तमाम पुलिस व स्थानीय प्रशासनिक महकमा पहुंच गए ग्रामीणों को मनाने में लग गए एसईसीएल के कनिष्ठ अधिकारी भी पहुंचे लेकिन ग्रामीण बरौद माइंस के मुख्य अधिकारी के आने और उनके आश्वासन पर ही चक्का जाम खोलने की जिद पर अड़े रहे अंत मे अधिकारी को आना पड़ा और उन्होंने तमाम मांगो का लिखित में आश्वासन दिया और साथ मे यह भी कहा कि तय समय शुदा में यदि ग्रामीणों की मांगें पूरी नही होती है तो वे आन्दोलन के लिए बाध्य होंगे।

बता दें कि ग्रामीण पूर्व में भी अधीकारियो के आश्वासन के झांसे में आ चुके हैं आश्वासन दे कर जाने के बाद अधिकारी मांगो को भूल जाते रहे है यही वजह है कि ग्रामीण इस बार कोई चूक नही करना चाहते थे धूल गुबार से निजात के लिए और वायु प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्यगत समस्या से निजात पाने के लिए जरूरी था।

चक्का जाम ज्यादा देर तक चलने से एसईसीएल को भारी क्षति का अनुमान लगाया जा रहा था यदि समय रहते चक्का जाम नही खत्म होता तो कोयले की आपूर्ति बाधित होती । चक्का जाम करने से वाहनों की लंबी लाइन लगनी शुरू हो गई थी।




