जशपुर मुनादी।।
जशपुर रियासत की बड़ी बहू व पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष प्रियंवदा सिंह जूदेव ने अपने ससुर भाजपा के दिवगंत नेता स्व दिलीप सिंह जुदेव की स्मृति में पंक्तियों की तुकबंदी करके उनसे जुड़ी कई ऐसी बातों का उल्लेख किया है जिसे बहुत कम ही लोग जानते होंगे । उन्होंने 8 पंक्तियों की कविता में उनके बारे में काफी कुछ बताने का प्रयास किया है ।

पहली पंक्ति में उन्होंने लिखा है ---"मेरे पितातुल्य ससुर को जशपुर का कर्ता-धर्ता बुलाया करते थे,पैर जहाँ पड़ते थे उनके ,लोग आदर से शीश झुकाया करते थे'
स्व जुदेव के द्वारा उनके जीवन काल मे जनहिहितैषी कार्यों का उल्लेख करते हुए दूसरी पंक्ति में उन्होंने लिखा है --"सैंकड़ो परोपकार हुए होंगे उस सज्जन के हाथों से ,कितनो की मुश्किल कम कर दी होंगी उन्होंने अपने हाथों से "
राजघराने में जन्म लेने के बावजूद उनकी सरलता और सादगी का वर्णन करते हुए उन्होंने लिखा है-"राजा का बेटा होकर भी खुद को किसान बुलाया करते थे ,कोई सुदामा दर पे आये तो कृष्ण बन जाया करते थे "
दोस्तो और दुश्मनों के लिए स्व जूदेव के मन मे क्या भाव होते थे और वे उनके बारे में क्या सोचते थे उस बारे में उन्होंने कुछ यूं लिखा है---"दोस्तो के दिल और दुश्मनों के दिमाग मे रहने वाले थे ,फंसाया गया उन्हें पर वो तो बेदाग निकलने वाले थे'
"इनके दुश्मन स्वांग रच रच रह जाते थे,इनके इरादे कुचल कुचलकर वो भगवा परचम लहराते थे "
नही रहे वो आज लेकिन लोगों के दिलो में जिंदा रहा करते हैं,आज भी उनकी गाथा सुनकर अंजान आँखें बहा करते हैं
आखिरी में उन्होंने लिखा है ----शब्द नही है मेरे पास अपने पितातुल्य ससुर का कैसे गुणगान करूँ
मैं तो बस शीश झुकाकर उस पुनीत आत्मा को प्रणाम करूँ ।
बहुरानी प्रियंवदा ने बात चीत के दौरान बताया कि उनके ससुर स्व दिलीप सिंह जूदेव न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज की एक प्रेरणा और आदर्श हैं और उनकी सोंच हमे स्वच्छ और निश्छल राजनीति सिखाती हैं। इस बात का उन्हें गर्व है कि वो स्व दिलीप सिंह जूदेव की बहू हैं ।

