जशपुर मुनादी।
कोरोना के कहर ने अब तक जशपुर में किसी की जान न ली हो पर जशपुर में अगर किसी की जान ली है तो वह है पोल्ट्री उधोग । जहां लगभग 80% पोल्ट्री फार्म बंद हो चुके हैं, वहीं शेष बन्द होने के कगार पर हैं। हालांकि सरकार ने इस संबंध में स्पष्ट भी कर दिया है कि पोल्ट्री व्यवसाय का इससे संबंध नहीं है लेकिन लोग इससे इतना डरे हुए हैं कि फिलहाल उन्होंने इसका उपयोग बंद कर दिया है।
हम आपको बता दें चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस के कहर से इस समय दुनिया लड़ रही है, इससे संक्रमित लोगों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है, वहीं अगर बात भारत की बात की जाए तो अब तक 32 लोगों में इस वायरस की पुष्टि हो चुकी है। इसमें से ज्यादातर मरीज का संबंध चीन से जुड़ा है।
दरअसल इस पूरे वाक्ये में ये बात है कि जब से दुनिया पर कोरोना का कहर शुरू हुआ तब से सोशल मीडिया पर तरह तरह की अफवाहें रोजाना हजारों की संख्या में पोस्ट हो रहे हैं, और इन अफवाहों से डर की चपेट में आम आदमी है। इनमे सबसी बडी अफवाह है ब्रायलर मुर्गों को खाने से कोरोना फैल रहा है, जशपुर के ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक बड़ा रूप ले चुके इस पोल्ट्री उधोग की अगर बात की जाए तो अकेले बगीचा क्षेत्र में ही स्थित लगभग 80% पोल्ट्री फार्म बंद हो चुके हैं। बाकी बचे पोल्ट्री बंद होने के कगार में है। हालत यह है कि 150 रुपये बिकने ब्रायलर का गोश्त पोल्ट्री फार्मो में 20 रुपये में खरीदने को कोई तैयार नहीं है, हालांकि पिछले दिनों ही छत्तीसगढ़ के कृषि सचिव ने मीडिया के माध्यम से यह स्पष्ट किया था कि पोल्ट्री उत्पाद में किसी प्रकार के कोरोना का संबंध नहीं है, लोग बेझिझक इसका उपयोग कर सकते हैं। पर अफवाहों का एक दौर ऐसा चला कि जशपुर जिले के सिर्फ बगीचा करोड़ों का व्यवसाय करने वाली यह ग्रामीण अव्यवस्था वाले इस उधोग पर कहर टूट पड़ा है, और कहें तो लगभग बर्बाद हो चुका है। अभी तक यह देखा जा रहा है कि प्रशासन भी इस उधोग को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नही उठा पाई है, और न ही अफवाहों से निपटने का कोई ठोस पर्याय ही सामने आया है। वही पोल्ट्री किसानों की अगर बात की जाए तो ये पोल्ट्री किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच चुके हैं, और बहुतेरे तो बर्बाद हो चुके हैं।

