रायगढ़ मुनादी।।
जहां सरकार और प्रशासन लॉक डाउन के जरिये लोगों में सोशल डिस्टेंस बढ़ाने में लगी है वहीं उद्योग अपने निजी स्वार्थ के लिए इसमें पलीता लगाते दिख रहे हैं। रविवार को जब जनता कर्फ्यू लगा तब कई उद्योगों ने दो शिफ्ट के लोगों को एक साथ बुलाकर 14 घंटे काम करवाया गया। यही नहीं कई उद्योगों ने अभी तक बायो मैट्रिक पंचिंग मशीन भी नहीं हटाया है।
कुछ दिन पहले ही कलेक्टर रायगढ़ ने उद्योगों की बैठक बुलाकर उन्हें सख्त हिदायत दी थी लेकिन इसका कोई असर उनपर पड़ता हुआ नहीं दिख रहा है। कोरोना और उससे बचने के तमाम उपायों को धता बताते दिख रहे हैं। सरकार जहां लोगों के बीच दूरी बनाने में लगी है वहीं उद्योगों के हरकतों से लगता नहीं कि उन्हें इससे कोई सरोकार भी है।
हालांकि इसके लिए शासन के स्पष्ट दिशा निर्देशों की कमी भी जिम्मेदार है लेकिन इस बीमारी को न फैलने देने की सामाजिक जिम्मेदारी भी सबकी है जिसके निर्वाहन की उम्मीद इन उद्योगों से भी की जाती है। हालांकि उद्योगों को लॉक डाउन करने का कोई आदेश देना सरकारों के लिए अभी संभव नहीं दिखाई दे रहा है लेकिन फिर भी उनकी तरफ से सोशल डिस्टेंस बरकार रहने देना भी उतना ही आवश्यक है जितना लॉक डाउन में आम आदमी का बाहर न निकलना।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि कोरोना संकट के दौरान श्रमिकों को किसी भी प्रकार से दिक्कत नहीं होनी चाहिए। श्रमिकों को सभी प्रकार की सुविधाएं मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर श्रम विभाग के सचिव सोनमणि बोरा ने राज्य के सभी निजी संस्थानों, कारखानों, अस्पतालों, मॉल, रेस्टोरेंट आदि के नियोजकों से मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए श्रमिकों एवं कर्मचारियों की छंटनी नहीं किए जाने और कोरोना वायरस (कोविड-19) से पीडि़त होने या अन्य कारणों से बीमार होने पर संवैतनिक अवकाश प्रदान करने के साथ ही आवश्यकता पडऩे पर उनसे घरों से भी कार्य लिए जाने के निर्देश दिए हैं।

