25-March-2020


Munaadi Breaking - अखबारों पर गहराया संकट, कई शहरों में नहीं बंटा अखबार, हॉकर्स ने हाथ खड़े किए, कहा- जान है तो जहान है, अखबार नहीं बंटेगा



रायगढ़ मुनादी।।

कोरोना संक्रमण और उसके रोकने के लिए लगाए गए लॉक डाउन के बीच आज छत्तीसगढ़ के कई शहरों में अखबार वितरण का काम भी ठप्प हो गया है। हालांकि किसी मीडिया हाउस ने अपना अखबार बैंड नहीं किया है लेकिन शहर के हॉकर्स ने अखबार बांटने से ही इंकार कर दिया। उनका कहना है कि हम खतरा मोल नहीं ले सकते। यह स्थिति छत्तीसगढ़ के कई छोटे शहरों में उत्पन्न हुई है जैसे कोरबा, रायगढ़ और कुछ हद तक जांजगीर चाम्पा में भी। उनका कहना है की हम इसके चपेट में आ गए तो हमें कौन देखेगा।

दूसरी ओर के घरों में अखबार पढ़ने से भी लोगों ने परहेज करना शुरू कर दिया है। अखबार बालकनी में पड़ा है लेकिन कोई न उसे उठा रहा है न ही कोई पढ़ रहा है। फिर भी कई लोग अखबार के तलबगार हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन जब हॉकर्स ही बांटने के लिए तैयार नहीं तो अखबार कैसे बंटे और बिना बंटे कोई इसे कैसे पढ़े। रायगढ़ शहर में आज से हॉकर्स ने कोई अखबार नहीं बांटा है।

हॉकर्स का तर्क है कि अखबार जहां से छपकर आ रहा है, वहां कोई संक्रमित हो तो उससे वह भी संक्रमित हो जाएगा, और वह यदि 300 घरों में भी अखबार देता है तो उससे 300 लोग संक्रमित हो सकते हैं। जब इतना बड़ा रिस्क है तो वे यह रिस्क क्यों मोल लें? हालांकि इस समय अखबार से दूरी बढ़ाने वालों के भी यही तर्क है कि यह अखबार कई हाथों से होकर गुजरता है, इसके सेनेटइज़ेशन की कोई व्यवस्था नहीं है तो इसे पढ़कर कोई खतरा क्यों मोल ले ?

इससे पहले मुम्बई के हॉकर्स भी यही बात करते हुए अखबार बांटने से हाथ खड़े कर चुके हैं, उनकी अखबार मालिकों के साथ बैठक भी हुई थी। हॉकर्स का यह भी कहना है कि स्मार्ट फ़ोन के इस दौर में ई-पेपर से भी काम चलाया जा सकता है तो अखबार छापने और बंटवाने की जिद्द क्यों ? बहरहाल अब देखना है कि हॉकर्स कितने दिन अखबार ने बांटने की जिद्द पर अड़े रहते हैं जबकि उनको मनाने का दौर भी शुरू हो चुका है।








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