जशपुर मुनादी।।
मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 2 साल पहले हरियाणा के गुड़गांव में ट्रेनिंग के लिए भेजे गए जशपुर के 100 से भी ज्यादा आदिवासी छात्र बुरी तरह फंसे हुए हैं।वे किसी तरह अपना गांव वापस लौटना चाहते है ।शुक्रवार की शाम सोशल मीडिया में इन छात्रों ने अपनी स्थिति को बयां किया था इसके बाद जशपुर कलेक्टर नीलेश क्षीर सागर ने इन छात्रों से दूरभाष पर सम्पर्क तो स्थापिति किया है लेकिन अभी तक उनकी वापसी को लेकर कोई समाधान नहीं निकाला गया है जिसको लेकर सभी छात्र चिंतित हैं और इस बार उन्होंने अपनी बातों को सरकार तक पहुंचाने मुनादी डॉट कॉम को माध्यम बनाया है।

हमारी बात एक ऐसे ही छात्र से हुई जो जशपुर जिले के मुंडा डीह गांव का रहने वाला हौ और कौशल विकास योजना के तहत उसे और उसके कई साथियों को ट्रेनिंग के लिए मारुति सुजुकी कम्पनी गुड़गांव भेजा गया था ।उसने बताया कि जशपुर जिले की तात्कालिन कलेक्टर डॉक्टर प्रियंका शुक्ला के मार्गदर्शन और प्रेरणा पाकर ये कम्पनी जॉइन कर लिए और उन्हें वर्तमाम तकरीबन 15 हजार की सैलरी भी पा रहे है लेकिन कोरोना वायरस की देश में हुई दस्तक के बाद यहाँ इनकी जिंदगी दिन ब दिन बद से बदतर होती जा रही है ।इन्हें न तो राशन मिल पा रहे है न ही इन्हें साफ पानी मिल रहा ।छात्र ने बताया कि लॉक डाउन के बाद उन्हें गंदा पानी पीने को मिल रहे हैं इससे कही संक्रमण इन तक न पहुंच जाय इसके लिए इन्हें भारी चिंता हो रही है
……सुनिये क्या कहा हमसे ?
छात्र ने बताया कि कल याने शुक्रवार की शाम को जशपुर कलेक्टर नीलेश क्षीर सागर ने उनसे मोबाईल पर सम्पर्क साधा था और उन्हें भरोसा दिया था कि आज याने शनिवार को जिले का कोई एथार्टी उनसे बात कर समस्या का समाधान निकलेगा लेकिन जिले से अबतक किसी भी अधिकारी ने उनसे बात नही की है लेकिन कम्पनी में ही इन्हें ट्रेनिंग दे रहे टीचर ने राशन पानी की व्यवस्था कराने का भरोसा दिया है ।छात्र ने बताया कि उनके पास आटा चावल के भी स्टॉक खत्म हो गए है और इनकी खरीददारी करने जाना मतलब पूलिस का डंडा खाना है ।इसके अलावे आस पास के दुकानों में राशन के स्टॉक भी खत्म हो गए हैं ।पीने का पानी भी दूषित है जिसे गर्म करके पीना पड़ रहा है।उसने बताया कि वह रायगढ़ संसदीय क्षेत्र की सांसद गोमती साय के गृहग्राम मुंडाडीह का रहने वाला है हांलाकि सांसद से अभी तक उनकी बात नही हो पाई है । उसने आगे बताया कि कम्पनी ने उन्हें छुट्टी दे दिया है और प्रति माह वेतन देने का भी वादा कर रही है लेकिन यहाँ के बिगड़ते हालात को देखकर उन्हें नही लगता कि यहाँ वे सुरक्षित हैं ।दूषित पानी कहीं इनकी दूसरी बीमारी का सबब न बन जाय इस बात को लेकर वे और ज्यादा चिंतित हो गए हैं।यहां फंसे होने का आंकड़ा जो बताया गया उस पर गौर करें तो पूरे छग से तकरीबन ढाई सौ लोग है जिनमे अकेले 100 से भी ज्यादा छात्र जशपुर जिले के हैं।

