रायपुर मुनादी।।
प्रदेश में एस्मा लगे होने व इमरजेंसी सेवाओं से जुड़े लोगों के द्वारा नौकरी न छोड़ने व प्रबंधन द्वारा उनके न हटाने के आदेश को दरकिनार कर राजधानी के एक बड़े अस्पताल ने न सिर्फ अपने कर्मचारियों की छंटनी कर दी बल्कि उनका वेतन देने से भी मना कर दिया। यह खबर सोशल मीडिया में आने के बाद जब इस संबंध में मुनादी द्वारा अस्पताल प्रबंधन से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लोगों ने खुद नौकरी छोड़ी है। सवाल यह उठता है।कि कोई कर्मचारी प्रदेश में एस्मा कानून लागू होने के बाद अपनी नौकरी कैसे छोड़ सकता है। इस मामले पर कांग्रेस नेता संजीव अग्रवाल ने अस्पताल प्रबंधन FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की है।
इस संबंध में कांग्रेस नेता द्वारा एक व्हाट्सएप्प चैट का स्क्रीनशॉट भी जारी किया गया है जिसमें कर्मचारियों को कम करने को बात कही गई है और उनके वेतन भी सिर्फ मार्च तक ही दिए जाने की बात कही है। लिहाजा यह स्क्रीन शॉट अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है।
रायपुर के आरटीआई कार्यकर्ता और काँग्रेस नेता संजीव अग्रवाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए मीडिया के माध्यम से एक बेहद ही संवेदनशील और गंभीर मामले को उजागर करते हुए बताया है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के देवेंद्र नगर स्थित नारायणा अस्पताल जिसके निदेशक डॉ सुनील खेमका हैं, ने अपने कर्मचारियों को आज के मेडिकल इमरजेंसी के दौर में सरकार के निर्देशों की अवहेलना करते हुए तानाशाही फ़रमान जारी किया है जिसमें उन्हें घर बैठने का नोटिस दिया गया है जिसके बदले में वो अपने कर्मचारियों को केवल मार्च तक का चेक प्रदान करेंगे।

संजीव अग्रवाल ने बताया कि एक तरफ जब प्रदेश में एस्मा लगा हुआ है तो इस मेडिकल इमरजेंसी के दौर में आपातकालीन सर्विसेस में जो भी लोग आते हैं वह छत्तीसगढ़ की जनता के लिए उनके स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए 24 घंटे तत्पर हैं। लेकिन डॉ सुनील खेमका जिनका अस्पताल श्री नारायणा हॉस्पिटल सरकार से प्राप्त शासकीय रेट मिली ज़मीन पर बना हुआ है वे स्वयं डॉक्टर होते हुए भी अपने कर्मचारियों को ऐसा तानाशाही फ़रमान सुना रहे हैं। क्या उन्हें मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के दिए गए आदेशों का ज़रा भी डर नहीं है? या फिर वे यह समझ रहे हैं कि वो अपनी मनमानी करते रहेंगे और प्रशासन कुछ नहीं कर सकता।
संजीव अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल से अपील की है कि ऐसे गैर जिम्मेदाराना रवैया के लिए नारायणा हॉस्पिटल को तुरंत सरकार अपनी कस्टडी में ले और डॉ सुनील खेमका के ख़िलाफ़ त्वरित कार्रवाई करते हुए सरकार के नियमों का और आदेशों का उल्लंघन करने के लिए व अपने कर्मचारियों का हक मारने के लिए अपराध दर्ज करने के बाद कठोर से कठोर कारवाही करे और उनका लाइसेंस भी रद्द कर दे। क्योंकि डॉक्टर सुनील खेमका हमेशा कुछ ना कुछ ऐसा तानाशाही रवैया करते हैं जिससे आए दिन उनकी कंप्लेंट आती रहती है। जैसे मृतक की बॉडी को रोक देना, उनके परिवारजनों से पैसा वसूल करना, इलाज के लिए गरीबों का दोहन करना आदि।
वहीं श्री नारायणा हॉस्पिटल के संचालक सुनील खेमका ने munaadi.com से हॉस्पिटल स्टाफ को कम करने की बात पर इंकार करते हुए कहा कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने अपने किसी भी स्टाफ को नही निकाला है। हॉस्पिटल स्टाफ को निकाले जाने का ठीकरा, हॉस्पिटल स्टाफ के परिजनो पर फोड़ते हुए सुनील खेमका ने कहा कि स्टाफ के परिजन ही उन्हें जबरदस्ती लेकर जा रहे है। छत्तीसगढ़ राज्य में आवश्यक सेवाओं में एस्मा लगे होने की बात पर हॉस्पिटल के संचालक सुनील खेमका ने गोलमोल जवाब देते हुए, स्टाफ द्वारा स्वयं चले जाने पर जोर देते हुए, उन्हें हॉस्पिटल मैनेजमेंट नही निकाले जाने की बात फिरसे कही।

