जशपुर(मनोरा)मुनादी//
कोरोना का कहर क्या होता है ओर अमीरों के घरों से निकले कोरोना वायरस की मार यहाँ के गरीब किस कदर झेल रहे हैं इसकी असली कहानी जाननी हो तो झारखण्ड के त्रिभुवन महतो से जरूर मिलिएगा । कोरोना वायरस के संक्रमण का पूरे देश मे हो रहे फैलाव को रोकने लिए सरकार द्वारा किये गए लॉक डाउन और लगाए गए धारा 144 का साईड इफेक्ट क्या है इनसे बेहतर कोई नही बता सकता। त्रिभुवन महतो झारखण्ड राँची के चुटिया थान्तर्गत ग्राम किलोखर के रहने वाले हैं।छग बलरामपुर जिले के किसी महुआ डोंगा गांव में कनष्ट्रक्शन कम्पनी के एक ठेकेदार के साथ काम कर रहे थे इसी बीच 15 दिन पहले प्रदेश की सरकार कोरोना को लेकर जगह जगह अलर्ट जारी करने लगी थी।देश मे बढ़ते कोरोना संक्रमण के प्रभाव और राज्य सरकार की बढ़ती सख्तियों को देख कनष्ट्रकशन ठेकेदार ने 15 दिन पहले ही हाथ खड़े कर दिए और काम धंधे के साथ अपना बोरिया बिस्तर भी समेट लिए ।ऐसे में इनके पास भी वहाँ से पलायन करने के अलावे इनके पास कोई चारा नही था लेकिन घर आने के लिए न तो इनके पास पैसे बचे थे न ही किसी ने इनका कोई सहयोग किया।उल्टा ग्रामीण इन्हें भी वहां से भगाने लगे और इन्होंने पैदल ही घर तक का सफर तय करने का फैसला लिया और 15 दिनों का सफर तय करते करते जब सोमबार को रात करीब 9 बजे कांताबेल पहुँचे तो अनजान आदमी को देखकर गांव वाले इन्हें कोरोना संक्रमित समझ बैठे और तुरन्त पूलिस एवं स्वास्थ विभाग को फोन कर दिया ।फोन पर सूचना पाकर पूलिस भी पहुँच गई और स्वास्थ विभाग की टीम भी और उनसे पूछताछ शुरू हो गयी।जानकारी देते हुए उसने बताया कि किलोखर गांव से काम करने वह महुआडोंगा गया था, महुआडोंगा से कोरोना की डर और 144 धारा से साथ मे काम करने वाले और ठेकेदार भी भाग खड़े हुए फिर आखिरी में वह भी महुआडोंगा गांव से निकल गया अपने गाँव झारखण्ड के लिए मगर रास्ता ही भूल गया और भूलते भटकते वह मनोरा के कांटाबेल पहुंच गया । त्रिभोवन महतों ने पूछताछ में ये भी बताया कि वो महुआडोंगा गांव से 15 दिन पहले निकले थे लेकिन न तो उन्हें कोई साधन मिले न ही साधन केलिए उनके पैसे थे।किसी तरह मांगते खाते उन्होंने आजतक का सफर तय किया और यहाँ पहुँचे।
बहरहाल फिलहाल त्रिभुवन महतो को मनोरा के एक सरकारी हॉस्टल में रखा गया है।मनोरा बीएमओ के द्वारा इनके भोजन और पेयजल की व्यवस्था कर दी गयी है । बीएमओ के द्वारा इन्हें 500 रु भी दिये गये हैं।फिलहाल लॉक डाउन के मद्देनजर इन्हें होस्टल में ही रखा जाएगा और जैसा कि कलेक्टर ने कल ही यह संदेश दिया था कि जो जहां है वही रुके रहे उनका वही पर इंतज़ाम होगा इस संदेश का फॉलो किया जा रहा है।

