प्रतापपुर मुनादी।।
राजधानी के औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा में कार्य करने वाले मजदूर काफी तादाद में उत्तरप्रदेश में अपने घरों की ओर लौट रहे है। प्रतापपुर-वाड्रफनगर सीमावर्ती क्षेत्र में भले शासन के निर्देशों का पालन करने के लिए स्थानीय प्रशासन इन्हें रोकने का प्रयास कर रहा है, लेकिन इस प्रयास में अभी तक अधिकारी विफल ही रहे है। कल रेवटी कैम्प से रात में 133 मजदूर भाग गए थे, जिनका कोई अबतक अता-पता नहीं है। आज भी यहां 140 मजदूर इकट्ठा हो चुके है, जो अपने घर जाने की जिद कर रहे है। इस दौरान आसपास के ग्रामीण इनको गांव में स्थित राहत कैम्प में रोकने का विरोध भी कर रहे है।
लॉकडाउन का पूर्णतः पालन कराने के लिए प्रदेश के आला अधिकारियों के निर्देश के बाद स्थानीय प्रशासन के लिए अन्य क्षेत्रों से आ रहे मजदूर परेशानी का सबब बनते जा रहे है। उत्तरप्रदेश सहित झारखंड की ओर जाने वाले मजदूरों को प्रतापपुर क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। इस मार्ग पर सूरजपुर जिले के अंतर्गत आने वाले थाना चंदौरा व चौकी रेवटी पड़ते है, जिसका यह अहम दायित्व बन जाता है कि वे इस प्रकार की आवाजाही पर अंकुश लगाये। इस कड़ाई के बाद भी रायपुर क्षेत्र से काफी तादाद में मजदूर प्रतापपुर क्षेत्र में पहुंच रहे है। इसमें सवाल यह खड़ा होता है कि अम्बिकापुर सहित अन्य थाना क्षेत्र में जब इस निर्देश का सख्ती से पालन किया जा रहा है तो इतनी तादाद में मजदूर प्रतापपुर क्षेत्र तक कैसे पहुंच जा रहे है ? पिछले दो दिनों में प्रतापपुर अनुविभाग के अंतर्गत काफी तादाद में मजदूर पहुंच रहे है, जिन्हें प्रतापपुर-वाड्रफनगर की सीमा में स्थित रेवटी व धोन्धा क्षेत्र में रोकने का प्रयास किया जा रहा है। कल भी यहां 133 मजदूरों को रोक कर उनके खाने की व्यवस्था करते हुए स्कूल भवन में रूकवाया गया था। इस दौरान इस क्षेत्र के लोग संक्रमण फैलने के डर से इनका जमकर विरोध कर रहे थे। विरोध को देखते हुए यहां मौजूद एसडीएम सीएस पैकरा, एसडीओपी राकेश पाटनवार, सीईओ निजामुद्दीन ने गांव वालों को समझाने का प्रयास किया था। अगले दिन स्थानीय प्रशासन को खबर मिली कि सभी मजदूर देर रात में ही यहां से भाग निकले। इधर मजदूरों के भागने की चर्चा शांत हुई ही नहीं थी कि दोपहर तक फिर 140 मजदूर रेवटी पहुंच गए। इनमें से ज्यादातर मजदूर सोनभद्र, जौनपुर, बलिया क्षेत्र के थे। प्रशासन को इसकी खबर लगते ही प्रतापपुर एसडीएम, एसडीओपी, बीएमओ, सीईओ मौके पर पहुंचे। इस दौरान चांचीडाँड़ स्कूल में ग्रामपंचायत की ओर से इनके भोजन की व्यवस्था की गई। इस बार भी आसपास के ग्रामीण इनके गांव में रुकने का पुरजोर विरोध कर रहे थे। ग्रामीण इन्हें बार-बार गांव से बाहर जंगल में इनको रोकने की बात कह रहे थे। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने इस मर्तबा भी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। इस दौरान हालात को देखते हुए सरपंच सहित आसपास के सचिव सहित पुलिस बल को तैनात किया गया, ताकि कोई तनाव की स्थिति निर्मित न हो। इधर रेवटी कैम्प में रखे गए सभी मजदूर बार-बार घर जाने की भी जिद कर रहे थे। मजदूरों के संभाग मुख्यालय से निकल कर अंतर्राज्यीय सीमा तक पहुंचने पर भी सवाल खड़े हो रहे है तो दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन पर भी आरोप लग रहे है कि इन प्रवासियों को गांव में रखने का विरोध देखते हुए वे भी कोई कड़े कदम नहीं उठा पा रहे है।

