सूरजपुर मुनादी।।
संगठित कोयला चोरों, तस्करों के सुरक्षित पनाहगार के रूप में बदनाम एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के महान-2 खदान से पुलिस और प्रशासन के सह पर कोयले का अवैध कारोबार फिर से आरंभ हो गया है। बार-बार शिकायतों के बावजूद कोयला चोरों, तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से वे बेखौफ होकर इस काले कारोबार में जुटे हुए हैं।
पिछले दिनों राजपुर पुलिस ने दिखावे की कार्रवाई कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। जिस बड़े कोयला तस्कर का नाम इस अवैध कारोबार में सामने आया था, उनके खिलाफ अभी तक पुलिस द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से बुलंद हौसलों के साथ वे कोयला चोरी करा तस्करी में भी लगे हुए हैं। आरोप है कि कोयले की काली कमाई का बड़ा हिस्सा पुलिस को भी जाता है, इसलिए पुलिस भी कार्रवाई से गुरेज करती है।
सूरजपुर और बलरामपुर जिले की सीमा पर स्थित एसईसीएल भटगांव क्षेत्र का महान-2 खदान लंबे समय से कोयला तस्करों का अड्डा बना हुआ है। संगठित कोयला चोर और तस्कर यहां से हर रोज कोयला चोरी कर धड़ल्ले से खफा रहे हैं। संगठित कोयला चोरों और तस्करों के आगे पुलिस और प्रशासन नतमस्तक हो चुकी है। काली कमाई का बड़ा हिस्सा मिलने के कारण पुलिस भी कोयला तस्करों से सांठगांठ कर इस अवैध कारोबार को बढ़ावा देने में अप्रत्यक्ष रूप से लगी हुई है।
आरोप है कि एसईसीएल प्रबंधन को भी कोयला चोरी से बड़ी क्षति उठानी पड़ रही है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण प्रबंधन कोयला चोरी रोक पाने में खुद को असहाय महसूस कर रहा है। पुलिस से जिस अनुरूप सहयोग और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए वह नहीं मिल पा रही है। कोयले की काली कमाई से लाल हो चुके तस्कर अब पहुंच और प्रभाव का दम दिखाकर क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों को भी डराने-धमकाने में लगे हुए हैं। पुलिस और प्रशासन के सह तथा संरक्षण में कोयले का काला कारोबार जिस तेजी से फल-फूल रहा है, उससे क्षेत्रवासियों में नाराजगी है। दिन के उजाले में एसईसीएल के कोयला परिवहन में लगी वाह ने गुजरती है तो रात के अंधेरे में कोयला तस्कर अपने काले कारनामों को अंजाम देते हैं। कोई भी विरोध का स्वर उठाए तो उसे दबाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी जाती है। पुलिस का सहयोग और समर्थन भी कोयला चोरों और तस्करों को ही मिलने के कारण उपजी परिस्थितियां कभी भी जन आक्रोश का बड़ा कारण बन सकती है। संगठित कोयला तस्करों की घुसपैठ के कारण एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के महान टू कोयला खदान क्षेत्र में फायरिंग मारपीट, शव मिलने जैसी गंभीर वारदात भी हो चुकी है। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की कोई कार्रवाई कोयला चोरी रोकने के लिए नहीं की जा रही है। बीच-बीच में राजपुर पुलिस दिखावे के लिए एकाध गाड़ी पकड़ खानापूर्ति कर देती है, इसमें भी चालकों को ही अपराधी बनाया जाता है।
सफेदपोश कोयला तस्करों के खिलाफ कार्रवाई से पुलिस भी हमेशा गुरेज करती रही है। पुलिस की यह मंशा ही क्षेत्र की शांति सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। यदि ग्रामीणों का गुस्सा भड़का तो कभी भी स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस के संरक्षण में ही कोयला चोरों और तस्करों की पौ बारह है। उन्हें किसी का डर नहीं है। महान-2 खदान में रात भर कोल माफिया के द्वारा कोयला चोरी कराया जा रहा है। खदान क्षेत्र से चोरी का कोयला कोतरीपारा पखनपारा में संग्रहित कराया जाता है और रात को भारी वाहनों में यहीं से कोयला लोड किया जाता है, इसकी जानकारी पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को भी है, लेकिन किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न होना समझ से परे है। कोल माफिया शाम होते ही अगल- बगल के गांव से 80 से 100 आदमी खदान में छोड़ जाते है। ये लोग टीपर, पिकआप में लोड कर बगल के गांव में कोयला इकट्ठा कर बड़ी गाड़ियों में लोड करते है। प्रतिदिन चोरी के कोयला का सात से आठ ट्रक लोड होकर निकलती है, जिसमे प्रशाशन मौन है। बताया जाता है कि मिलीभगत से कोयला माफिया बेफिक्र होकर कोयला रात भर चोरी कराया जा रहा है। कोयला चोरी और तस्करी के लिए बदनाम एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के महान-2 खदान के बाद अब कोयला तस्करों माफियाओं की नजर महान-3 खदान में भी लग चुकी है। यहां कोयला का उत्पादन शुरू होते ही कोल माफिया सक्रिय हो गए हैं। इस खदान से भी प्रतिदिन कोयला पार किया जा रहा है। आरोप है कि कोल माफियाओं द्वारा सेटिंग के दम पर यहां से भी रात के अंधेरे में कोयला पार कराया जा रहा है।

