जशपुर मुनादी।। जशपुर जिले के ओडिशा और झारखंड की सीमाओं से सटा तपकरा इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है। वजह सिर्फ एक गाँव की मांग नहीं, बल्कि उस पहचान को वापस पाने की लड़ाई है, जो करीब आधी सदी पहले उससे छीन ली गई थी।
बहुत कम लोग जानते हैं कि 1974 से पहले तपकरा एक विकासखंड (ब्लॉक) हुआ करता था। लेकिन प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद विकासखंड कार्यालय यहां से करीब 13 किलोमीटर दूर फरसाबहार स्थानांतरित कर दिया गया। तब से लेकर आज तक तपकरा अपनी पुरानी पहचान वापस पाने का इंतज़ार कर रहा है।
इस इतिहास का सबसे बड़ा गवाह तपकरा हाईस्कूल परिसर में लगा वह स्मारक शिलालेख है, जिसे देश की आज़ादी के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर स्थापित किया गया था। इस पत्थर पर संविधान और स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों का उल्लेख होने के साथ-साथ साफ लिखा है कि तपकरा उस समय एक विकासखंड था।
स्थानीय लोगों का दावा है कि आज भी कई पुराने सरकारी अभिलेखों में तपकरा का उल्लेख विकासखंड के रूप में मिलता है। यही वजह है कि अब ग्रामीणों ने फिर से तपकरा को ब्लॉक का दर्जा दिलाने के लिए संगठित प्रयास शुरू कर दिए हैं।
इस मांग को लेकर लोगों में उम्मीद इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि जशपुर जिले के विधायक आज प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी सरकार के कार्यकाल में तपकरा को उसका खोया हुआ सम्मान वापस मिल सकता है, तो वह समय अभी है।
अब सवाल सरकार से है—
जब इतिहास, शिलालेख और सरकारी अभिलेख तपकरा की पुरानी पहचान की गवाही दे रहे हैं, तो क्या सरकार इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का साहस दिखाएगी?
तपकरा के लोग किसी नई सौगात की मांग नहीं कर रहे, बल्कि उस पहचान को वापस चाहते हैं जो कभी उनकी थी। अब निगाहें मुख्यमंत्री और राज्य सरकार पर टिकी हैं। देखना होगा कि क्या "विकसित छत्तीसगढ़" के संकल्प में तपकरा का यह अधूरा सपना भी पूरा होगा, या फिर यह मांग एक और फाइल बनकर सरकारी दफ्तरों में दब जाएगी।