रायगढ़ मुनादी।। छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले में वेदांता कंपनी के पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इस दर्दनाक घटना के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है और वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
इसी बीच इस कार्रवाई पर देश के जाने-माने उद्योगपति और सांसद नवीन जिंदल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बिना जांच के सीधे चेयरमैन को नामजद करने पर आपत्ति जताई है।
जिंदल का बयान: “पहले जांच, फिर कार्रवाई”
नवीन जिंदल ने अपने पोस्ट में लिखा कि छत्तीसगढ़ की घटना बेहद दुखद है और इसमें कई परिवारों ने सब कुछ खो दिया है। उन्होंने पीड़ितों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और निष्पक्ष जांच की मांग की।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी जांच से पहले वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम FIR में डालना गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि अनिल अग्रवाल का प्लांट के दैनिक संचालन से कोई सीधा संबंध नहीं है। जिंदल ने तर्क दिया कि जब सरकारी उपक्रमों (PSU) या रेलवे में हादसे होते हैं, तो सीधे चेयरमैन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता, वही मानक निजी क्षेत्र पर भी लागू होना चाहिए।
“सिस्टम पर भरोसा जरूरी”
अपने पोस्ट में जिंदल ने यह भी कहा कि भारत के “विकसित भारत” (Viksit Bharat) विजन के लिए निवेशकों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने लिखा कि— “पहले जांच हो, सबूतों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए, उसके बाद कार्रवाई होनी चाहिए।”
राजनीतिक और कानूनी बहस तेज
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी बहस को तेज कर दिया है। एक ओर सरकार कड़ी कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं उद्योग जगत से जुड़े लोग प्रक्रिया और जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है।