पत्थलगांव जिला बनेगा या फिर सिर्फ़ चुनावी जुमला, सियासत के उफान में जनता के सवाल

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January 08, 2026



पत्थलगांव जिला बनेगा या फिर सिर्फ़ चुनावी जुमला, सियासत के उफान में जनता के सवाल

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जशपुर मुनादी।। पत्थलगांव को जिला बनाए जाने का मुद्दा एक बार फिर सियासी तूफान बनकर खड़ा हो गया है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस और उसकी सोशल मीडिया विंग इस मुद्दे को लेकर लगातार भाजपा, खासकर स्थानीय विधायक गोमती साय को घेरने में जुटी है। बहस उस वक्त और तेज हो गई जब विधायक गोमती साय ने मूनादी चौपाल को दिए एक साक्षात्कार में जिला गठन के लिए स्थानीय नेताओं को “लायजनिंग” करने की सलाह दे दी।

विधायक की इस सलाह को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया गया। सवाल उठने लगे कि जब अब तक बने जिलों में कहीं भी “लायजनिंग” की जरूरत नहीं पड़ी, तो फिर पत्थलगांव के मामले में ऐसा क्या खास है? क्या यह जिम्मेदारी सरकार और शासन की नहीं है? या फिर यह सिर्फ़ जनता को टालने और बरगलाने का नया तर्क है?

पुराना मुद्दा, नई सियासत

दरअसल, पत्थलगांव को जिला बनाने की मांग कोई नई नहीं है। वर्षों से इस मुद्दे पर आंदोलन होते रहे हैं। यह शायद इकलौता ऐसा मुद्दा है जिसने यहां दो-दो बार सीनियर विधायक रामपुकार सिंह को चुनावी हार का स्वाद चखाया।

2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पत्थलगांव को जिला बनाने का आश्वासन दिया। इसी वादे के दम पर छह बार के विधायक रामपुकार सिंह को भाजपा के शिवशंकर साय से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन 2013 से 2018 तक भाजपा सरकार के बावजूद जिला नहीं बन सका।

कांग्रेस का वादा, भाजपा की वापसी

2018 के चुनाव में कांग्रेस ने इस मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठाया और पांच साल के भीतर जिला बनाने का वादा किया। नतीजा यह हुआ कि 2013 में 5 हजार वोटों से हारने वाले रामपुकार सिंह ने 2018 में 37 हजार वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की।
लेकिन 70 से अधिक विधायकों वाली कांग्रेस सरकार भी 2018 से 2023 के बीच पत्थलगांव को जिला नहीं बना पाई।

2023: वादे ने बदला चुनावी परिणाम

2023 के चुनाव आते-आते भाजपा ने इस मुद्दे को फिर से पूरी तरह गर्म कर दिया। माहौल ऐसा बन गया कि जनता तय कर चुकी थी—जो जिला बनाने की बात करेगा, वही जीतेगा। इस माहौल को भांपते हुए गोमती साय ने मतदान से ठीक चार दिन पहले एलान किया कि अगर वह जीतती हैं और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती है, तो पत्थलगांव को जिला बनाने की कोशिश सबसे पहले होगी।

यह दांव काम कर गया। कांग्रेस के दिग्गज रामपुकार सिंह फिर हार गए और गोमती साय मात्र 255 वोटों के अंतर से विधायक बन गईं।

दो साल बाद भी सवाल वही

प्रदेश में भाजपा सरकार बने और गोमती साय को विधायक बने अब दो साल हो चुके हैं, लेकिन जिला गठन को लेकर न तो कोई प्रशासनिक हलचल दिखी और न ही कोई ठोस संकेत। ऐसे में कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर फिर से आक्रामक हो गई है। विधायक पर वादाखिलाफी के आरोप लग रहे हैं और भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

जिला कब बनेगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है—पत्थलगांव आखिर जिला बनेगा कब?
या फिर यह मुद्दा सिर्फ़ चुनाव जीतने का हथकंडा बनकर रह जाएगा?

हालांकि यह भी सच है कि सरकार के अभी सिर्फ़ दो ही साल पूरे हुए हैं और इस दौरान पत्थलगांव को नगरपालिका का दर्जा मिल चुका है। ऐसे में जिला बनने की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फिर गया है, ऐसा कहना भी जल्दबाज़ी होगी।

सरकार के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो आगामी तीन वर्षों में कभी भी पत्थलगांव को जिला बनाने का एलान हो सकता है। लेकिन वह दिन कब आएगा—इसका इंतज़ार आज भी पत्थलगांव की पूरी जनता कर रही है।


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