22-April-2022


पुलिस विभाग में प्रमोशन का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, आगे की पदोन्नति अब कोर्ट के निर्णय पर निर्भर, दो हफ्तों में जवाब मांगा, पढ़िए पूरी खबर



बिलासपुर मुनादी।। रायपुर जिले में पदस्थ प्रधान आरक्षक को एएसआई की पदोन्नति परीक्षा से वंचित कर दिया गया था। इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन और पुलिस विभाग से 2 सप्ताह में अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश जारी करते हुए कहा है कि तत्संबंध में आगे जारी की जाने वाली हेड कांस्टेबल से सहायक उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति की सूची इस प्रकरण में पारित होने वाले निर्णय के अधीन रहेगी।

रायपुर जिले में हेड कांस्टेबल के पद पर पदस्थ सरजू राम यादव को पूर्व में मिली दीर्घशास्ति उनके वेतन में से एक वेतनवृद्धि के बराबर की राशि की कमी एक वर्ष के लिए असंचयी प्रभाव से किये जाने के चलते पुलिस विभाग ने सरजू यादव को हेड कांस्टेबल से सहायक उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ हेड कांस्टेबल ने अपने अधिवक्ता अनादि शर्मा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की। जिसकी सुनवाई माननीय न्यायाधीश पी सैम कोशी की एकल पीठ में हुई।

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याचिका पर माननीय हाईकोर्ट ने राज्य शासन को दो हफ्ते के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं और साथ ही हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि रायपुर रेंज में सहायक उप-निरीक्षक के पद पर पदोन्नति इस याचिका में पारित होने वाले निर्णय के अधीन रहेगी।

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अधिवक्ता अनादि शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में हेड कांस्टेबल से सहायक उप-निरीक्षक पद पर पदोन्नति की परीक्षा 23 अप्रैल 2022 से शुरू हो रही है, जिसमें रायपुर जिले में हेड कांस्टेबल के पद पर पदस्थ सरजू राम यादव को वर्ष 2017 में मिली दीर्घशास्ति उनके वेतन में से एक वेतनवृद्धि के बराबर की राशि की कमी एक वर्ष के लिए असंचयी प्रभाव से किये जाने के चलते, पुलिस विभाग ने पदोन्नति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। जिस पर हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की थी जिसकी सुनवाई जस्टिस पी सैम कोशी की एकल पीठ में हुई।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अनादि शर्मा ने यह दलील पेश की कि प्रार्थी को दी गई सजा छोटी सजा की श्रेणी में आता है। इसके अलावा प्रार्थी की सजा की अवधि समाप्त हो जाने के कारण उन्हें पदोन्नति परीक्षा में भाग लेने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। अधिवक्ता श्री शर्मा ने कोर्ट को बताया कि पदोन्नति परीक्षा के एक दिवस पहले योग्यता सूची जारी करना विधिसंगत नहीं है और ऐसी सूची से ग्रसित कोई भी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

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इन तर्कों के आधार पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन और पुलिस विभाग से 2 हफ्ते के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश जारी करते हुए ये कहा कि तत्सम्बंद आगे जारी की जाने वाली हेड कांस्टेबल से सहायक उप-निरीक्षक पद पर पदोन्नति कि सूची इस प्रकरण में पारित होने वाले निर्णय के अधीन रहेगी।








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